सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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छोटे बच्चों की परवरिश के सम्बन्ध में
पिलाता ही अच्छा है। वैसी अवस्था में दो ही उपाय हैं—या तो कोई धाय लगाई जाय, और नहीं तो गाय का दूध दिया जाय।
धाय ऐसी हो कि जितने दिन के बालक के लिए धाय चाहिए उतने ही दिन का बालक उसकी गोद का हो। दस-पाँच दिन की न्यूनता की कोई बात नहीं; क्योंकि ऐसा न होने से उसका दूध बच्चे की प्रकृति के अनुकूल न होगा। धाय में इतनी बातें देखनी चाहिए:—
(१) युवा और सुन्दर हो, बहुत मोटी या कूरा नहीं।
(२) उसकी सन्तान भर तो नहीं जाती।
(३) उसे कोई रोग—कोढ़ खाज, दमा, चूय, आदि तो नहीं हैं।
(४) गर्भवती तथा ऋतुमती न हो।
(५) क्रोधी, झूठी, लवार, गन्दी, और वात्सल्यहीना न हो।
(६) सुखीला, हँसमुख, संतोषी हो।
(७) पहलौटी न हो। दूसरे-तीसरे की जती हो। स्तन ऊँचे, कठोर और लम्बे हों।
यदि ऐसी धाय न मिले तो उसे गाय का दूध देना ही ठीक होगा; किन्तु इस दूध को नीचे की विधि से ठीक करना होगा; क्योंकि गाय का दूध भारी और गाढ़ा होता है। सो वह यदि चिना पतला किये बालक को दिया जावेगा तो बच्चे का पेट बिगड़ जावेगा और रोगी हो जायगा।
साधारणतः बराबर गरम पानी मिलाकर दूध को पहले दे। और यदि वह न पचे तो यह विधि करे—
पान में खाने का चूना दो पैसा-भर लेकर एक बड़ी चोतल में
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ताजा पानी भरकर उसमें डाल दे। और कसकर डाट लगा दे। और लूझ हिलावे; फिर पानी को ठहरने दे। पाँच-छैं घण्टे पीछे उसका पानी निथार कर दूसरी बोटल में डाल दे। यह चूर्णादिक हुआ। यही चूर्णादिक एक तोला, गरम पानी एक तोला, दूध कच्चा आठ तोला मिलाकर थोड़ी चीनी मिलाकर पिलाओ—पाचन होगा।
दूध पिलाने की काँच की दुब्बी आती हैं; पर वे अच्छी तरह साफ नहीं होती—काँचमें बहुत शीघ्र ही कीड़े पड़ जाते हैं। सो उस का प्रयोग हानिकारक है। इससे यदि उसे प्रयोग करना है, तो दिन में दो बार गर्मजल से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसका काम तुतई (टूटीदार छोटी घण्टी) में रबर की चूसनी, जो बाजार में मिलती है, लेकर काम चल सकता है; पर इसे भी धोने में सावधानी रखनी चाहिए; क्योंकि दूध बहुत शीघ्र विगड़ जाता है। परन्तु सबसे अच्छा और सरल उपाय एक यही है कि रुई के फोहे के द्वारा दूध पिलाया जाय।
बाजार में बिलायती दूध भी बना-बनाया (Condensed Milk के नाम से) मिलता है, उसे पिलाना ठीक नहीं; क्योंकि वह बहुत दिनों का रक्खा हुआ विगड़ा हुआ और दूषित होजाता है। अधिकोश में मेढी और गद्दी का दूध होता है।
ऐसा न करके यदि केवल पानी मिलाकर ही दूध पिलाया जायगा इससे भी उसके पेट में दर्द रहेगा। और बालक रोएगा। बहुधा बालक दूध पीते-पीते स्तनमें सिर मार देते हैं जिससे नाड़ी का मुख बन्द होकर स्तन सूज जाता है और बालक की माता को ज्वर
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होजाता है। इसकी यह चिकित्सा करे कि रोटी बनाने के बाद गरम-गरम तवा नीचे उतारकर रखदे और पानी (ताजे) से स्तन को इस प्रकार धोना शुरू करे कि सारा पानी टपक-टपककर नीचे तवे पर पड़े और उसकी भाप उठकर स्तन को लगे। दो-तीन दिन में स्वर उतर जायगा। सूजन भी कम हो जायगी। यदि सूजन अधिक हो तो यह क्रिया करे—
पोस्त के डोड़े एक तोले, मकोय सूखी एक छटॉक लेकर एक सेर पानी में पकावे। जब आधा पानी रह जाय उसे एक टूटी दार लोटे में मुँहबन्द करके टूटी दार भाप लगावे। शीघ्र आराम होगा। इस स्वर से भय की कोई बात नहीं है।
सस्ता साहित्य मण्डल की,
‘सर्वोदय साहित्य माला’ में प्रकाशित पुस्तकें ।
[ नोट— × निशान वाली पुस्तकें अप्राप्य हैं । ]
| १-दिव्य-जीवन | (I=) | २३-स्वामीजी का बलिदान × (I=) |
|---|---|---|
| २-जीवन-साहित्य | (१) | २४-हमारे जमाने की गुलामी × (I) |
| ३-तामिल वेद | (II) | २५-छी और पुरुष (II) |
| ४-व्यसन और न्यभिचार (II=) | २६-घरों की सफाई (I=) | |
| ५-सामाजिक कुशीतियाँ × (II) | २७-क्या करें ? (१) | |
| ६-भारत के छी-रत्न (३ भाग) (३) | २८-हाथ की कताई बुनाई × (II=) | |
| ७-अनोखा × (१=) | २९-आत्मोपदेश × (I) | |
| ८-ब्रह्मचर्य-विज्ञान (II=) | ३०-न्यार्थ आदर्श जीवन × (II=) | |
| ९-यूरोप का इतिहास (२) | ३१-जब अंग्रेज नहीं आये थे— (I) | |
| १०-समाज-विज्ञान (१II) | ३२-गङ्गा गोविन्दसिंह × (II=) | |
| ११-खहरका संपत्तिशास्त्र × (II=) | ३३-श्रीरामचरित्र (१I) | |
| १२-गोरों का प्रभुत्व × (II=) | ३४-आश्रम-हरिणी (I) | |
| १३-चीन की आवाज × (I=) | ३५-हिन्दी मराठी कोप × (२) | |
| १४-द० अम्मीका का सत्याग्रह (१I) | ३६-स्वाधीनता के सिद्धान्त × (II) | |
| १५-विजयी बारडोली × (२) | ३७-महान् मातृत्व की ओर (II=) | |
| १६-अनीति की राह पर (II=) | ३८-शिवाजी की योग्यता (I=) | |
| १७-सीता की अग्नि-परीक्षा (I=) | ३९-तरंगित हृदय (II) | |
| १८-कन्या-शिवा (I) | ४०-नरसिंह (१II) | |
| १९-कर्मयोग (I=) | ४१-ढुली दुनिया (I=) | |
| २०-कलवार की करतूत (I=) | ४२-जिन्दा लाश (II) | |
| २१-न्यायहारिक सभ्यता (II) | ४३-आत्म-कथा (गाँधीजी) (१) (१I) | |
| २२-अंधेरे में उजाला (II) | ४४-जब अंग्रेज आये × (१=) |
[ २ ]
| ४५-जीवन-विकास १।), १।।) | ६८-स्वतंत्रता की ओर— १।।) |
|---|---|
| ४६-किमानों का विगुल × १=) | ६९-आगे बढ़ो ! ॥।) |
| ४७-फॉसी ! ॥=) | ७०-बुद्ध-वाणी ॥=) |
| ४८-अनासक्तियोग—गीताबोध | ७१-कामेस का इतिहास २।।), १=) |
| दे० (नवजीवनमाला) | ७२-हमारे राष्ट्रपति १) |
| ४९-स्वर्ण विहान × ॥=) | ७३-मेरी कहानी(ज० नेहरू)२।।) |
| ५०-मराठों का उत्थान-पतन २।।) | ७४-विश्व-इतिहास की मलक |
| ५१-भाई के पत्र १) | (ज० नेहरू) ८), १=) |
| ५२-स्वगत × ॥=) | ७५-(दे० नवजीवनमाला) |
| ५३-युगधर्म × १=) | ७६-नया शासन विधान-१ ॥।।) |
| ५४-खी-समस्या १।।।।) | ७७-[१] गाँवों की कहानी ॥।) |
| ५५-वि० कपडेका मुकाबिला × ॥=) | ७८-[२] महाभारत के पात्र ॥।) |
| ५६-चित्रपट ॥=) | ७९-सुधार और संगठन १) |
| ५७-राष्ट्रवाणी × ॥=) | ८०-[३] संतवाणी ॥।) |
| ५८-इङ्लैंड में महात्माजी ॥।।) | ८१-विनाश या इलाज ? ॥।।) |
| ५९-रोटी का सवाल १) | ८२-[४] अंग्रेजी राज्य में |
| ६०-दैवी सम्पद् ॥=) | हमारी आर्थिक दशा ॥।) |
| ६१-जीवन-सूत्र ॥।।) | ८३-[५] लोक-जीवन ॥।) |
| ६२-हमारा कलंक ॥=) | ८४-गीता मंथन १।।) |
| ६३-बुद्धबुद्ध ॥।) | ८५-[६] राजनीति प्रवेशिका ॥।) |
| ६४-संधर्प या सहयोग ? १।।) | ८६-[७] अधिकार और कर्तव्य ॥।) |
| ६५-गांधी-विचार-दोहन ॥।।) | ८७-गांधीवाद : समाजवाद ॥।।) |
| ६६-एशिया की क्रांति × १।।।।) | ८८-स्वदेशी : ग्रामोद्योग ॥।) |
| ६७-हमारे राष्ट्र-निर्माता १।।।) | ८९-[८] सुगम-चिकित्सा ॥।) |
आगे होनेवाले प्रकाशन
१-जीवन शोधन—(किशोरलाल मशरूवाला)
२-हमारी आजादी की लड़ाई [२ भाग]—(हरिभाऊ उपाध्याय)
३-फेसिस्टवाद
४-नया शासन विधान—(फेडरेशन)
५-ब्रह्मचर्य—(गाँधीजी)
६-समाजवाद : पूँजीवाद—(शोभालाल गुप्त)
७-सरल विज्ञान—१ (चन्द्रगुप्त वाष्ण्येय)
८-दुनिया की शासन पद्धतियाँ ( रामचन्द्र वर्मा )
९-हिन्दुस्तान की गरीबी ( दादाभाई नौरोजी )
१०-हमारे गाँव ( चौ० मुख्तार सिंह )
११-विद्यार्थियों से ( म० गाँधी )
१२-लोक साहित्य माला—(इसमें भिन्न-भिन्न वपयोंपर २०० पृष्ठों की पुस्तकें निकलेंगी । मूल्य प्रत्येक का ॥) होगा ।
१३-गाँधी साहित्य माला—(इसमें गाँधीजी के चुने हुए लेखों का संग्रह होगा—प्रत्येक का दाम ॥) होगा ।
१४-टालस्टाय ग्रंथावली—(टालस्टाय के चुने हुए निबंधों, लेखों और कहानियों का संग्रह । प्रत्येक का मूल्य ॥),
१५-बाल साहित्य माला—(बालोपयोगी पुस्तकें)
१६-नवराष्ट्र माला—इसमें संसार के प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र-निर्माताओं और राष्ट्रों का परिचय होगा और पुस्तकें सचित्र होंगी । मूल्य ॥॥)
१७-नवजीवनमाला—छोटी-छोटी नवजीवन दायी पुस्तकें ।
१८-सामयिक साहित्य माला—सामयिक विषयों और घटनाओं पर देश के नेताओं के विचार ।
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