सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ साधु को अंग ॥ [ १३७ काम ही न क्रोध जाकै लोभ ही न मोह ताकै, मद ही न मच्छर न, कोऊ न विकारी है । दुख ही न सुख मानै पाप ही न पुन्य जानै, हरष न शोक आन देह ही तै न्यारौ है ॥ निंदा न प्रशंसा कर राग ही न दोष धरै, लेन ही न देन जाकै कछू न पसारौ है । सुन्दर कहत ताकी अगम अगाध गति, ऐसी कोऊ साधु सु तौ रामजी कौ प्यारौ है ॥१६॥ आठौ जाम यम नेम आठौ जाम रहै प्रेम, आठौ जाम जोग जज्ञ कियौ बहु दान जू । आठौ जाम जप तप आठौ जाम लियौ बत, आठौ जाम तीरथ मैं करत है न्हान जू ॥ आठौ जाम पूजा बिधि आठौ जाम आरती हू, आठौ जाम दडवत समरन ध्यान जू । सुन्दर कहत तिन कियौ सब आठौ जाम, सोई साधु जाकै उर एक भगवान जू ॥१७॥ (१७) जाम-याम, पहर । जग्य-यज्ञ । न्हान-स्नान । समरण-स्मरण ।