सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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१६४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ आपने भाव तै सूर सौ दीसत, आपुनै भाव तै चंद्र सौ भासैं। आपुनै भाव तैं तार अनत जु, आपुनै भाव तैं वीजु उजासै ॥ आपुनै भाव तैं नूर है तेज है, आपुनै भाव तै जोति प्रकासै। तैसौ ही ताहि दिखावत सुदर, जैसो ही होत है जाहि कौ आसै ॥८॥ आपुनै भाव तै सेवक साहिब, आपुनै भाव सबै कोऊ ध्यावै। आपुनै भाव तै अन्य उपासत, आपुनै भाव तै भक्त हू गावै ॥ आपुनै भाव तै दुष्ट सहारत, आपनै भाव तै वाहिर आवै। जैसौ हि आपुनौ भाव है सुदर, ताहि कौ तैसौ हि होइ दिखावै ॥६॥ आपुनै भाव तै दूर वतावत, आपुनै भाव नजीक वखान्यो। आपुनै भाव तै दूध पिवायौ जु, आपनै भाव तै वीठल जान्यौ ॥