सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ जैसे काहू भूत लग्यौ बकत है आकबाक, सुधि सब दूरि भई औरै मति आई है। तैसे ही सुन्दर यह भ्रूम करि भूलौ आप, भ्रूम कै गये तै यह आतमा सदाई है ॥१४॥ आपु ही चेतन यह इद्रिनि चेतनि करि, आपु ही मगन होइ आनन्द बढायौ है। जैसे नर शीतकाल सोवत निहाली ओढि, आपु ही तपत करि आपु सुख पायौ है॥ जैसे बाल लकरी कौ घौरा करि डाकि चढै, आप असवारि होइ आप ही कुदायौ है। तैसे ही सुन्दर यह जड कौ सजोग पाइ, पर सुख आपु मानि, आपु ही-भुलायौ है ॥१५॥ कहू भूल्यौ कामरत, कहू भूल्यौ साधि जत, कहू भूल्यौ गृहि मधि, कहू वनबासी है। कहू भूल्यौ नोच जानि कहू भूल्यौ ऊच मानि, कहू भूल्यौ माह बाधि कहू तौ उदासी है ॥ कहू भूल्यौ मौन धरि कहू बकबाद करि, कहू भूल्यौ मक्कै जाइ कहू भूल्यौ कासी है। सुन्दर कहत अहकार ही तै भूल्यौ आप, एक आवै रोज अरु दूजै बडी हासी है ॥१६॥ (१५) निहाली-रजाई ।