भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 183

१७४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ औरऊ कष्ट करै अतिशै करि, प्रत्यक आतम तत्त न पेखै । सुन्दर भूलि गयौ निज रूप ही, है कर ककन दर्पन देखै ॥१६॥ सूत्र गले महि मेलि भयौ द्विज, ब्राह्मन व्है कर ब्रह्म न जान्यौ । छत्रिय व्है करि छत्र धर्यौ सिर, है गय पैदल सी मन मान्यौ ॥ वैशि भयौ वपु की वय देखत, झूठ प्रपंच वनिज्‍ज हि ठान्यौ । शूद्र भयौ मिलि शूद्र शरीर ही, सुन्दर आपु नही पहिचान्यौ ॥२०॥ ज्यो रवि कौ रवि ढूंढत है कहु, तप्ति मिलै तनु शीत गवाऊ । ज्यौ शशिकौ शशि चाहत है पुनि, शीतल व्है करि तप्ति बुझाऊ । ज्यौ सनिपात भये नर टेरत, है घर मैं अपनै घर जाऊ । त्यौ यह सुन्दर भूलि स्वरूप ही, ब्रह्म कहै कब ब्रह्म हि पाऊ ॥२१॥

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक) · पृष्ठ 183, कुल 284 में से · BharatKosha