भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 284 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 217

२०८ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ शीत घाम पवन गगन मैं चलत आइ, गगन अलिप्त जा मैं मेघ हू अनत हैं। तैसै ही सुन्दर यह सृष्टि एक ब्रह्म माहिं, ब्रह्म नि कलंक सदा जानत महत है ॥४॥ ॥ इति ब्रह्म निष्कलंक को अंग सम्पूर्ण ॥ (४) महत-उच्च श्रेणी के ज्ञानी पुरुष। स्वेदज- ऊष्मा से पैदा होने वाले प्राणी। जरायुज-जेर से निकलने वाले प्राणी। अंडज-अंडे से निकलने वाले। उदभिज- जमीन मे से निकलने वाले।

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक) · पृष्ठ 217, कुल 284 में से · BharatKosha