भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

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पृष्ठ 218

॥ आतम अनुभव को अंग ॥ [ २०६ अथ आतम अनुभव को अंग ॥२८॥ इन्दव छंद है दिल मैं दिलदार सही, आंखिया उलटो कर ताहि चितइये । आब मैं खाक मैं वाद मैं आतस, सुन्दर जानि मैं जानि जनइये ॥ नूर मैं नूर है तेज मैं तेज है, ज्योति मैं ज्योति मिलै मिल जइये । क्या कहिये कहतै न बनै कछु, जौ कहिये कहतै हि लजइये ॥१॥ जासौ कहू सब मैं वह एक सौं, तौ कहै कैसौ है आखि दिखइये । जौ कहू रूप न रेख तिसै कछु, तौ सब झूठ के मानि कहइये ॥ जौ कहू सुन्दर नैननि माझि, तौ नैनहू बैन गये पुनि कहइये । क्या कहिये कहते न बनै कछु, जौ कहिये कहते ही लजइये ॥२॥ (१) दिलदार-प्रियतम, परमेश्वर । आब पानी । खाक-पृथ्वी । वाद-वायु । आतस-अग्नि, तेज ।