सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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२५६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ मन कछु और नाहि बुद्धि कछु और नाहि, चित्त कछु और नाहि अहकार तीर है। सुदर कहत एक ब्रह्म बिनु और नाहि, आपु ही मैं आपु व्यापि रह्याँ सब ठौर है ॥२८॥ ॥ इति अद्वैत ज्ञान को अग सम्पूर्ण ॥