भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

पृष्ठ 265, कुल 284 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 265

२५६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ मन कछु और नाहि बुद्धि कछु और नाहि, चित्त कछु और नाहि अहकार तीर है। सुदर कहत एक ब्रह्म बिनु और नाहि, आपु ही मैं आपु व्यापि रह्याँ सब ठौर है ॥२८॥ ॥ इति अद्वैत ज्ञान को अग सम्पूर्ण ॥