सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४० ] ॥ सुन्दर विलास ॥ जैसे कोऊ गुडी कौ चढावत गगन माहि, ताहू की तौ धुनि मुनि वैसे ही बखानिये । सुन्दर कहत तैसे काल कौ प्रचंड बेग, रात दिन चल्यौ जाइ अचिरज मानिये ॥२१॥ माया जोरि जोरि नर राखत जतन करि, कहत है एक दिन मेरै काम आइ है । तोहि तौ मरत कछु बार नहि लागै शठ, देखत ही देखत बुलूला सो बिलाइ है ॥ धन तौ धर्योई रहै चलत न कौडी गहै, रीते ही हाथनि जैसौ आयौ तैसौ जाइ है । करि लै सुकृत यह बरिया न आवै फेरि, सुन्दर कहत पुनि पीछे पछिताइ है ॥२२॥ बावरौ सौ भयौ फिरै बावरी ही बात करै, बावरे ज्यौ देत वायु लागत बौरानौ है । माया कौ उपाइ जानै माया की चातुरी ठानै, माया सौं मगन अति माया लपटानौ है ॥ (२१) भभीरी-झींगुर कीडा । गुडी-पतंग । (२२) वलूला-पानी का बुदबुदा, झाग । सुकृत-सत्कर्म । बरिया-मौका, अवसर । देत वायु-बकवाद करता है । बोरानो बोराया हुआ मा । चातुरी-चतुराई ।