भारतकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

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दशमः सर्गः जज्ञे नृदेवादथ गङ्गदेवात् सोमेश्वरो नाम समः स्मरेण । राज्यं गुणप्राज्यमनुक्रमज्ञः क्रमागतं यः सुमुखः शशास ॥ १ ॥ राजा गङ्गदेव के कामदेव के समान सुन्दर सोमेश्वर नामक पुत्र उत्पन्न हुए जिन्होंने क्रमा- नुसार कुलपरम्परागत समृद्ध राज्य का शासन किया ॥ १ ॥ प्रलम्बबाहुः परिणाहिवक्षाः प्रलम्बवैरिप्रतिमल्लमूर्तिः । विहारभूमिर्विजयस्य भूमाविहाऽरविन्दप्रभवेन सृष्टः ॥ २ ॥ सोमेश्वर आजानुबाहु, चौड़े वक्षःस्थल वाले, बलदेव के समान वीर थे। उनको ब्रह्मा जी ने मानों पृथ्वी पर विजय की विहार-भूमि के रूप में निर्मित किया था ॥ २ ॥ स्वभावरम्येण मनोजमैत्रीं स्वभाबलेनाऽविरतं दधानम् । विभावयन्ति स्म निभालयन्त्यो विभावरीकान्तममुं सुमध्याः ॥ ३ ॥ स्वभाव से ही सुन्दर अपनी आभा के कारण निरन्तर कामदेव से मित्रता रखनेवाले राजा सोमेश्वर को दखकर रमणियाँ उन्हें चन्द्रमा (सोम) ही समझती थीं ॥ ३ ॥ ० शकुन्तलाऽऽभां गुणरूपशीलैः स कुन्तलानामधिपस्य पुत्रीम् । कर्पूरधारां जनलोचनानां कर्पूरदेवीमुदुवाह विद्वान् ॥ ४ ॥ विद्वान् सोमेश्वर ने कुन्तल देश के राजा की कन्या कर्पूरदेवी का, जो गुण, रूप और शील में शकुन्तला के समान थी और लोगों के नेत्रों को कपूर की धारा के समान आनन्द देती थी, पाणिग्रहण किया ॥ ४ ॥ लावण्यपूर्णामृतपुण्यवेणी मनोभुवो मूर्तिमती प्रशस्तिः । आसीत् कलानामधिदेवता सा विनोदभ