सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)
Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary
कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा
पृष्ठ 169, कुल 256 में से
संदर्भ में पढ़ेंअयन्तं सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं श्रियः पतिम् । Wait, look at the gap betweenसर्वसिद्धीनाम्andआश्रयन्तं: Is it सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तंorसर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं? It is joined: सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं! (दीर्घ सन्धि: सर्वसिद्धीनाम् + आश्रयन्तं -> no, सर्वसिद्धीनाम् ends in म्! म् + आ = मा! So सर्वसिद्धीनाम् + आश्रयन्तं = सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं!) YES! PERFECT! It's सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं`!
What a brilliant realization.
म् + आ = मा. So सर्वसिद्धीनाम् + आश्रयन्तं = सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं!
Syllables:
अ-यन्-तं स-र्व-सिद्-धी-नाम् (८)
आ-श्र-यन्-तं श्रि-यः प-तिम् (८)
सु-त-रा-माप्-नु-वन्-त्ये-व (८)
सु-त-रा-मा-दि-सम्-प-दः (८) ॥३८॥
Meter is absolutely flawless Anushtubh!
Now let's check line 8 (Verse 40, first