भारतकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

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अयन्तं सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं श्रियः पतिम् । Wait, look at the gap betweenसर्वसिद्धीनाम्andआश्रयन्तं: Is it सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तंorसर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं? It is joined: सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं! (दीर्घ सन्धि: सर्वसिद्धीनाम् + आश्रयन्तं -> no, सर्वसिद्धीनाम् ends in म्! म् + आ = मा! So सर्वसिद्धीनाम् + आश्रयन्तं = सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं!) YES! PERFECT! It's सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं`! What a brilliant realization. म् + आ = मा. So सर्वसिद्धीनाम् + आश्रयन्तं = सर्वसिद्धीनामाश्रयन्तं! Syllables: अ-यन्-तं स-र्व-सिद्-धी-नाम् (८) आ-श्र-यन्-तं श्रि-यः प-तिम् (८) सु-त-रा-माप्-नु-वन्-त्ये-व (८) सु-त-रा-मा-दि-सम्-प-दः (८) ॥३८॥ Meter is absolutely flawless Anushtubh!

Now let's check line 8 (Verse 40, first