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सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

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    Top header line: चतुर्थः सर्गः (center), ३९ (right)

    Main text: उपरतमवगत्य वज्रसूनुं यवनपतिर्जवेन वाजिनाऽथ । सहचरितचमूचरस्तरस्वी समरसमुत्कमनास्ततार सिन्धुम् ॥४७॥ वज्रपुत्र विश्वपति को कैलासवासी जान कर यवनपति वेगशील अश्व पर आरूढ़ हो, अपने साथ एक बड़ी सेना लेकर, वेग से सिन्धु के पार, युद्ध की इच्छा से, आया ॥४७॥ अभिपतितुमुदग्रानुद्धतान् पारसीकान् करिण इव मदान्धान् दूतवक्त्राद् विदित्वा । हरिरिव हरिराजस्तान् नियन्तुं नियन्ता सममुचितबलेन द्राक् प्रतीचों प्रतस्थे ॥४८॥ [L