सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२२ सूरसागर सार सटीक लगा कि (इन्हें) रोक दूं। (कृष्ण के) कुंडल की झटक (हिलना) देखकर वह अटक सा (स्तब्ध सा) रह गया, (मानों) शिला सी गटक गया हो, उसकी मृत्यु (मानो) जग गई हो। (कृष्ण ने) जो-जो मल्ल थे सभी को तुरन्त मारा, सभी असुर, योद्धाओ का संहार कर दिया। दौड़कर दूतों ने (कंस से) कहा, (कि) कोई शेष नही रहा, शूरवीर बलराम, कृष्ण ने सभी को पछाड़ दिया ॥२६॥ नवल नंदनंदन रंगभूमि राजैं। स्याम तन, पीत पट मनौ घन मैं तड़ित, मोर के पंख माथैं विराजैं। स्रवन कुडल झलक मनौ चपला चमक, दृग अरुन कमल दल से विसाला। भौंह सुंदर धनुप, बान सम सिर तिलक, केस कुंचित सोह भृंग माला। हृदय वनमाल, नूपुर चरन लाल, चलत गज चाल, अति बुधि विराजै। हंस मानौ मानसर अरुन अंबुज सुभर, निरखि आनंद करि हरषि गाजैं। कुवलया मारि चानूर मुष्टिक पटकि, वीर दोउ कंध गज-दंत धारे। जाइ पहुँचे तहाँ कंस बैठ्यौ जहाँ, गए अवसान प्रभु के निहारे। ढाल तरवारि आगैं धरी रहि गई, महल कौ पंथ खोजत न पावत। लात कैं लगत सिर तैं गयौ मुकुट गिरि, केस गहि लै चले हरि खसावत। चारि भुजा धारि तेहिं चारु दरसन दियौ, चारि आयुध चहूँ हाथ लीन्हे। असुर तजि प्रान निरवान पद कौं गयौ, विमल मति भई प्रभु रूप चीन्हे। देखि यह पुहुप वर्षा करी सुरनि मिलि, सिद्ध गंधर्व जय धुनि सुनाई। सूर प्रभु अगम महिमा न कछु कहि परति, सुरनि की गति तुरत असुर पाई ॥२७॥ अर्थ-नवल कृष्ण रंग-भूमि मे सुशोभित हैं। श्याम शरीर पर पीताम्बर मानो बादल मे बिजली हो, मोर के पंख मस्तक पर विराज रहे हैं। श्रवण के कुंडल मानो बिजली की चमक हो। आंखे लाल कमलदल के समान विशाल हैं। भौंह सुन्दर धनुष के समान हैं। सिर का तिलक बाण के समान है। कुंचित बाल भौरों की माला (पंक्ति) के समान है। हृदय पर वनमाला, लाल चरणो मे नूपूर, गज के समान चाल तथा अत्यधिक बुद्धि विराजित है (अत्यन्त बुद्धिमान हैं)। हंस मानों कमल से भरे मान- सरोवर को देखकर आनन्द से हर्षित होकर बोल रहे हैं। कुवलय (हाथी) को मारकर, मुष्टिक को पटककर दोनो वीर कंधे प...रण किये हुये हैं। वहां जाकर पहुँचे जहां कंस बैठा था। देखा (कृष्ण ने) ये। ढाल-तलवार आगे ...रह गयी, महल का रास्ता चटक कर प्राण । घोर शब्द ही सिर से मुकुट खिसक तथा (तब ... कड़कर कृष्ण धर्मति भूल गई, यही धारण करके, चारों हाथों हैं जिन्हें नगर... ये उसे सुन्द तजकर निर्वाण पद को प्राप्त वाले है। उन्हो... का रूप विमल हो गयी। यह देखकर . मारच्यो... र गंधवों ने जय-जयकार की