सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३६ सूरसागर सार सटीक सूर पथिक सुनि मोहिँ रैनि दिन, बढ़यौ रहत उर सोच। मेरौ अलक लड़ैतौ मांहन, ह्वैहै करत सँकोच ॥५८॥ अर्थ—देवकी से यह संदेश कहना। मैं तो तुम्हारे पुत्र की धाय ही हूँ, किन्तु (तुम) प्रेम करते ही रहना। यद्यपि तुम उनकी जिद जानती हो तो भी मुझे कहना ही पड़ रहा है कि प्रातः होते ही मेरे लाल को माखन-रोटी ही अच्छी लगती है। तेल उबटन तथा गर्म जल देखकर भाग जाते थे। जो-जो माँगते थे वही-वही देती थी, (तब कही) क्रम-क्रम (कठिनाई) से नहलाती थी। सूरदास कहते हैं (यशोदा कहती हैं) कि पथिक, सुनो ! मेरे हृदय में दिन-रात (इस बात का) सोच बढ़ता है कि मेरा दुलारा पुत्र सकोच करता होगा ॥५८॥ मेरे कुँवर कान्ह बिनु सब कुछ, वैसेहिँ धर्यौ रहै। को उठि प्रात होत लै माखन, को कर नेति गहै। सूने भवन जसोदा सुत के, गुन गुनि सूल सहै। दिन उठि घर घेरति ही ग्वारिनि, उरहन कोउ न कहै। जो ब्रज मैंँ आनंद हुतौ, मुनि मनसा हू न गहै। सूरदासी स्वामी बिनु गोकुल, कौड़ी हू न लहै ॥५६॥ अर्थ—मेरे कुँवर कृष्ण के बिना सब कुछ वैसे ही रखा रहता है। प्रातः उठकर कौन माखन ले और हाथ में रई की रस्सी ग्रहण करे। पुत्र से शून्य घर में (पुत्र की) याद करके यशोदा दुख सहती हैं। दिन में उठकर ग्वालिनियां घर घेरती थी, (किन्तु) अब कोई शिकायत नहीं करता। ब्रज में जो आनन्द था उसे मुनि मन में भी नहीं सोच पाते। सूरदास कहते हैं (यशोदा कहती हैं) कि कृष्ण के बिना गोकुल कौड़ी के बराबर आनन्द भी नहीं देता ॥५६॥ गोपी विरह चलत गुपाल के सब चले। यह प्रीतम सौँ प्रीति निरंतर, रहे न अर्ध पले। धीरज पहिल करी चलिबँ की, जैसी करत भले। धीर चलत मेरे नैननि देखे, तिहिँ छिनि आँसु हले। आँसु चलत मेरी वलयनि देखे, भए अंग सिथिले। मन चलि रह्यौ हुतौ पहिलैँ ही, चले सबै विमले। एक न चलै प्रान सूरज प्रभु, अस लेहु साल सले ॥६०॥ अर्थ-कृष्ण के चलते समय सभी (अंग) चल पड़े। प्रीतम से निरंतर प्रीति के कारण (कोई) आधे पल भी नहीं रुके । चलने के लिए धैर्य ने पहल की; जैसे भले आदमी करते हैं नेत्रो ने धैर्य को जाते देखा तो उसी क्षण (नेत्रो से) आंसू बहने लगे । आँसुओ के चलते ही मेरे बलयों (चूडियो) ने देखा, और (वे भी) अंग मे शिथिल हो गये (कलाइयो के पतली पड़ जाने के कारण चूड़ियां भी हाथ से गिर गईं !)। मन तो पहले ही चल