सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउद्धव संदेश २८१ मेरे जान यहै जुवतिनि कौ, देत फिरत दुख पी कौ। ता सराप तँ भयौ स्याम तन, तउ न गहत डर जी कौ। जाकी प्रकृति परी जिय जैसी, सोच न भली बुरी कौ। जैसैं सूर ब्याल रस चाखैँ, मुख नहिँ होत अमी कौ ॥५२॥ अर्थ-उद्धव सुन्दर मत देने को आये है। चतुर सखियों आओ, सब मिलकर सुनो तथा सुयश का टीका लो। (ऊधो) वस्त्र, आभूषण तथा घर, स्नेह और पुत्र को भी छोडने को कहते है। अंग मे भस्म लगाने की, सिर पर जटा धारण करने की तथा फीके निर्गुण की सीख देते है। मेरी समझ में ये युवतियों को इसी प्रकार दुख देते फिरते हैं। उसी शाप से ये काले शरीर वाले हो गये हैं, तब भी हृदय मे डर नही ग्रहण करते । जिसका जैसा स्वभाव होता है, वह भी वैसा ही हो जाता है, उसे भले बुरे की सोच नही रहती है। सूरदास कहते हैं कि (गोपियाँ कहती हैं) सर्प अमृत रस को कितना भी चखे किन्तु उसका मुख अमृतमय नही होता ॥५२॥ प्रकृति जो जाकें अंग परी । स्वान पूँछ कोउ कोटिक लागै, सूधी कहूँ न करी। जैसैं काग भच्छ नहिं छाँड़े, जनमत जौन घरी। धोए रंग जात नहिं कैसेहुँ, ज्यौं कारी कमरी। ज्यौं अहि डसत उदर नहिं पूरत, ऐसी धरनिँ धरी। सूर होइ सो होइ सोच नहिं, तैसेइ एऊ री ॥५३॥ अर्थ- जिसके शरीर का जैसा स्वभाव हो गया है, (वह) वैसा ही रहता है। कुत्ते की पूंछ को कोई लाख प्रयत्न करे लेकिन उसे सीधी नही कर सकता। जैसे कौवा जिस घड़ी जन्म लेता है, उसी घड़ी से अभक्ष्य नही त्यागता। जैसे काली कमरी का रंग धोने से नही जाता है। जैसे सांप के डसने से कभी उसकी उदरपूर्ति (संतोष) नही होती, किन्तु डसने की उसने ऐसी टेक पकड़ ली है। सूरदास कहते है कि (गोपियां कहती है) जो होना हो उसकी चिंता नही, वैसे ही ये (उद्धव) भी है ॥५३॥ समुझि न परति तिहारी ऊधौ । ज्यौं त्रिदोष उपजैं जक लागत, बोलत बचन न सूधौ । आपुन कौ उपचार करो अति, तब औरनि सिख देहु । बड़ौ रोग उपज्यों है तुमकौं, भवन सबारैं लेहु । ह्वाँ भेषज नाना भाँतिन के, अरु मधु-रिपु से बैद । हम कातर डरपतिं अपनैं सिर, यह कलंक है खेद । साँची बात छाँड़ि अलि तेरी, झूठी को अब सुनिहै। सूरदास मुक्ताहल भोगी, हंस ज्वारि क्यों चुनिहै ॥५४॥ अर्थ-उद्धव ! तुम्हारी (बात) समझ में नही आती। जैसे वात-पित्त तथा कफ के समन्वय से एक जक उत्पन्न हो जाती है, वैसे ही तुम शुद्ध (सीधी) बात नही