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सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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परिशिष्ट (ख) ३७७ असुर जो कृष्ण द्वारा मारा गया। द्र० भा०, स्कं० १० पू०, अ० ३७; सू०, प० २०१४ । खगराज—गरुड पक्षी, जो विष्णु का वाहन माना जाता है और जो कश्यप की पत्नी विनता से उत्पन्न है। उनकी दूसरी पत्नी कद्रू से उत्पन्न सर्पों से इसकी जन्मजात शत्रुता है। एक बार सर्पों ने अपना भारी संहार देखकर प्रति मास बारी से एक सर्प देने का निश्चय किया, परन्तु कालीय नाग ने गर्ववश अपना हिस्सा नही दिया तथा गरुड़ से युद्ध किया। परन्तु अन्त में घायल होकर रमणक द्वीप छोड़ ब्रज मे यमुना के एक गम्भीर दह में जाकर रहने लगा, जहां ऋषि शाप के कारण गरुड नही जा सकता था। देखो रिषिसाप तथा काली। गज—हाथी (१) त्रिकूट पर्वत का एक प्रसिद्ध हाथी जो पूर्व जन्म में राजा इन्द्रद्युम्न था और अगस्त मुनि के शाप से पशु योनि को प्राप्त हुआ था। जलाशय मे स्नान करते समय एक बार एक ग्राह द्वारा पकडे जाने पर इसने भगवान् को सहायतार्थ पुकारा। भगवान् ने उसे ग्राहपाश से ही नही, पशु योनि से भी मुक्त कर दिया। द्र० भा०, स्कं० ८, अ० २-४; सू०, प० ४२८-४३३ । (२) कुवलया पीड। देखो कुवलया पीर। गजराज—देखो गज । गणिका—जीवन्ती नाम की एक वेश्या जो बिना समझे हुए भी तोते को राम नाम पढ़ाने के कारण मोक्ष पा गई । गर्ग—यादवो के पुरोहित; जिन्हे वसुदेव ने कृष्ण का नामकरण करने के लिए गोकुल भेजा था। कृष्ण-बलराम के अन्य संस्कारो में भी गर्ग मुनि के पौरोहित्य का उल्लेख हुआ है। गर्ग ने नामकरण के ही अवसर पर कृष्ण-बलराम के अलौ- किक व्यक्तित्व की सूचना दी थी। गुरु-सुत—कृष्ण-बलराम के गुरु सांदीपिनि का पुत्र, जो प्रभास क्षेत्र के सागर में डूब गया था और जिसे श्रीकृष्ण ने यमपुरी से लाकर गुरु-दक्षिणा मे गुरु को भेंट किया था। ग्राह—मगर, घड़ियाल, यहाँ पर इस ग्राह के लिए प्रयुक्त जिसने त्रिकूट पर्वत पर रहने वाले गजेन्द्र को सरोवर मे स्नान करते समय पकड़ा था। भगवान् विष्णु ने गज की पुकार पर उसे तो संकट-मुक्त किया ही, ग्राह का सर काट कर उसे भी पशुयोनि से मुक्त कर दिया। ग्राह पूर्व जन्म मे हू हू नामक गंधर्व था जो देवल ऋषि के शाप से ग्राह हो गया था। देखो गज । चानूर—(चाणूर)—कंस का एक असुर मल्ल, जिसे श्रीकृष्ण ने धनुष यज्ञ के अवसर पर आयोजित मल्ल-युद्ध में मारा था। पूर्व जन्म मे यह मय दानव था। द्र० भा०, स्कं० १० पू०, अ० ४४; सू०, प० ३६८३-३६८५ ।