भारतकोश
सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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थे तब विदुर के घर ही ठहरे थे । दुर्योधन के अभिमान भरे राजसी आतिथ्य के स्थान पर उन्हे विदुर का प्रेमभरा साग-पात का भोजन अधिक रुचा था । विभीषण—(विभीषण)—रावण का भाई, जो राक्षस कुल का होते हुए भी अत्यन्त न्यायशील, धर्मात्मा और राम-भक्त था । राम ने उसके योग-क्षेम के लिए तथा उसे लंकापति बनाने के लिए सीता को लौटाने या शक्ति बाण से आहत मरणासन्न लक्ष्मण को जिलाने से भी अधिक चिंता प्रकट की थी । व्याध — (व्याध) — आदिकवि वाल्मीकि जो प्रारम्भ मे अनाथ ब्राह्मण बालक होने के कारण भीलो द्वारा पाले गए थे । जीव हत्या और डकैती ही इनका व्यवसाय था । इनकी स्त्री भी एक भीलनी थी । एक बार सप्तर्षियों पर डाका डालने के बाद ये 'मरा' 'मरा' जपने लगे, जो 'राम' 'राम' का मन्त्र हो गया । इसी से इन्हे सद्बुद्धि मिली और इन्होने घोर तपस्या करके उद्धार पाया । व्योम— (व्योमासुर)—मयासुर का पुत्र एक असुर, जो एक बार पर्वत शिखरो पर 'निलायन' नामक खेल खेलते हुए गोपो मे गोप बनकर मिल गया और खेल मे पशु बने हुए बालको को एक-एक करके ले जाने लगा । श्रीकृष्ण उसकी माया ताड़ गए और उन्होने उसे दबोचकर तथा पटककर मार डाला । द्र० भा०, स्कं० १०, अ० ३७; सू०, प० २०१५ । ब्रह्मा — त्रिदेव में से एक, परन्तु पुराणो मे विष्णु की अपेक्षा उन्हे सदैव नीचा चित्रित किया गया है । विष्णु ने इन्हे नाभि-कमल से उत्पन्न करके सृष्टि रचना का भार इन्ही को सौंपा तथा सर्वप्रथम इन्हीं को वेद का ज्ञान दिया । 'भागवत' के अनुसार सर्वप्रथम ब्रह्मा ने ही चतुश्लोकी 'भागवत' विष्णु भगवान् के मुख से सुनी थी, वही उन्होने अपने मानस पुत्र नारद को सुनाई तथा नारद ने उसे व्यास को सुनाया । 'भागवत' मे ब्रह्मा की अपेक्षा कृष्ण की महिमा अधिक सिद्ध करने के लिए ब्रह्मा द्वारा अज्ञानवश गोचारण के अवसर पर गो-वत्स हरण का प्रसंग वर्णित है । श्रीकृष्ण ने ब्रह्मा का मोह और गर्व मिटाने के लिए हरण किए गए गो-वत्स की ही तरह नवीन गो-वत्स की सृष्टि कर ली । तब ब्रह्मा ने शरण मे जाकर कृष्ण की स्तुति की । द्र० भा०, स्कं० १० पू०, अ० १३-१४; सू०, प० १०५४-१०५६, ११०१-११०६, १११० । भृगु — एक ऋषि, जो शिव के पुत्र कहे गये हैं । एक बार यह जानने के लिए कि त्रिदेव मे सबसे बड़ा कौन है, इन्होने तीनो का अपमान किया । ब्रह्मा और महेश तो क्रुद्ध हो गए; परन्तु जब उन्होने विष्णु को लात मारकर सोते से जगाया, तब उन्होने क्रोध करने के बजाय इनसे पूछा कि आपके पैर मे चोट तो नही लगी तथा उनके पद-चिन्ह को सदैव अपने वक्ष पर धारण किया । द्र० भा०, स्कं० १० उ, अ० ८६; सू०, प० ४८२६ ।