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सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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४६ सूरसागर सार सटीक उसे अन्य सहेलियों ने बताया तब उसके शरीर (मन) का कष्ट नष्ट हुआ । स्वप्न में किसी स्त्री को भ्रम हो गया कि बच्चा कही खो गया है, किन्तु उसने जगकर देखा कि वह [पार्श्व मे] ज्यों का त्यों ही वर्तमान है, न कही गया है न कही से आया है । सूरदास जी कहते हैं कि [आत्म स्वरूप के] ज्ञान की ऐसी ही दशा है कि उसमें ज्ञानी मन ही मन मुसकरा कर रह जाता है । इस सुख की महिमा वर्णनातीत है, जैसे गूंगे द्वारा गुड के स्वाद की अभिव्यक्ति अशक्य होती है ॥५४॥

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