सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७० सूरसागर सार सटीक अर्थ-गोपी यशोदा से शिकायत करती हुई कहती है कि हे नन्दरानी कृष्ण को क्यो नही रोकती । (हम लोग) एक ही गांव के निवासी हैं, नन्द का संकोच कहां तक करे । तुम यदि यह कहती हो कि मेरा कृष्ण गंगाजल की भांति पवित्र है (तो यह ठीक नहीं है-क्योकि) वे बाहर श्रेष्ठ किशोर और तरुण बनकर रास्ते और घाट पर दान लेने वाले हैं। कमल के समान नेत्रो वाले कृष्ण विचित्र और सरस विशिष्ट वाणी मे बातचीत करते हैं। हे नन्दरानी यह आश्चर्य है कि अब तुम्हारे सामने इनकी बोली तोतली हो गयी है। (मां यशोदा ने कहा) कहां मेरा (छोटा-सा) कृष्ण और कहां तुम (युवती) गोपियां यह विपरीत बात नहीं जानी जाती । सूरदास कहते हैं कि गोपियां उलाहना देने के बहाने आती हैं और कृष्ण को देखकर मुस्कराने लगती हैं ॥५१॥ मथुरा जाति हौं वेचन दहियौ । मेरै घर कौ द्वार, सखी री तवलौं देखति रहियौ । दधि-माखन द्वै माट अछूते तोहिं सौंपति हौं सहियौ । और नहौं या ब्रज मैं कोऊ, नन्द-सुवन सखि लहियौ । ते सब बचपनि सुने मन-मोहन, वहै राह मन गहियौ । सूर पौरि लौं गई न ग्वालिन, कूद परे दै धहियौ ॥५२॥ अर्थ-एक गोपी दूसरी गोपी से कहती है कि मैं मथुरा दही बेचने जा रही हूँ। हे सखि, तुम तब तक मेरे घर का दरवाजा देखती रहना । मैं पूरे भरे हुए दही के दो मटके और मक्खन तुम्हे सौंपे जा रही हूँ। "हे सखि इस ब्रज मे और कोई नही (चोर) है, केवल नन्द-पुत्र (कृष्ण) को देखती रहना ।" वे सभी बाते मन-मोहन (कृष्ण) सुन रहे थे और उनके मन ने वही राह पकड ली । सूरदास कहते हैं कि ग्वालिन रास्ते तक भी न गयी होगी कि भगवान् धाड मारकर (खींचकर उसके घर मे) कूद पढे ॥५२॥ गए स्याम ग्वालिन घर सूनैं । माखन खाइ, डारि सब गोरस, वासन फोरि किए सब चूने । बड़ौ माट इक बहुत दिननि कौ, ताहि करचौ दस टूक । सोवत लरिकनि छिरकि मही सौं, हँसत चले दै कूक । आइ गई ग्वालिनि तिहिं औसर, निकसत हरि धरि पाए । देखे घर बासन सब फूटे, दूध दही ढरकाए । दोउ भुज धरि गाढ़ैं करि लीन्हैं, गई महरि कै आगै । सूरदास अब बसे कौन ह्यां, पति रहिहैं ब्रज त्यागै ॥५३॥ अर्थ-श्रीकृष्ण गोपी के सूने घर मे गये । उन्होंने मक्खन खाकर सभी गोरस गिराकर बर्तनो को तोडकर चूर्ण कर दिया । बहुत दिनों का एक (पुराना) बड़ा मटका था, उन्होंने तोड़कर उसके दस टुकड़े कर दिये । सोते हुए लड़को पर दही छिड़क कर किलकते हुए हंस कर चल दिये । इसी समय गोपी आ गयी और श्याम को घर से निकलते हुये पकड़ लिया । घर मे देखा, सभी बर्तन फूटे हुये हैं और दूध दही ढरका