भारतकोश
सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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गोकुल लीला ७१ हुआ है। दोनों भुजाओं को मजबूती से पकड़कर वह कृष्ण को मां यशोदा के पास ले गयी। सूरदास कहते हैं कि (गोपी कहने लगी कि) अब यहां कौन बसे ? अब तो ब्रज छोड़ने पर ही लाज बचेगी ॥५३॥ करत कान्ह ब्रज-घरनि अचगरी । खीझति महरि कान्ह सौं पुनि-पुनि, उरहन लै आवति हैं सगरी । बड़े बाप के पूत कहावत, वै वास बसत इक बगरी । नन्दहु तैं ये बड़े कहैहैं फेरि बसैहैं यह ब्रज नगरी । जननी कैं खीझत हरि रोए, झूठहिं मोहिं लगावति धगरी । सूर स्याम मुख पोंछि जसोदा, कहति सबै जुवती हैं लंगरी ॥५४॥ अर्थ - कृष्ण ब्रज के घर-घर मे शरारत करते हैं। मां यशोदा कृष्ण पर बार- बार बिगड़ती हैं कि वे सभी (गोपियां) उलाहना ले-लेकर आती हैं। तुम बड़े बाप के बेटे कहे जाते हो, हम और वे एक ही घर (बगल) में निवास करते है। अब तो कृष्ण- नंद से भी बढ़कर कहलाएंगे और प्रतीत होता है कि इस ब्रज नगरी को (उजाड़ कर) फिर से बसायेगे। मां के क्रोध करने पर भगवान् रोने लगे और कहा कि ये कुलटाये मुझे झूठ मे ही (दोष) लगाती है। सूरदास कहते हैं कि श्याम के मुख को पोंछ करके यशोदा कहती हैं कि सभी स्त्रियां दुष्ट हैं ॥५४॥ अपनौ गाउँ लेउ नँदरानी । बड़े बाप की बेटी, पूतहिं भली-पढ़ावति बानी । सखा-भीर लै पैठत घर मैं आप खाइ तौ सहिए । मैं जब चली सामुहैं पकरन, तब के गुन कहा कहिए । भाजि गए दुरि देखत कतहूँ, मैं घर पौढ़ी आइ । हरैं हरैं वेनी गहि पाछैं बाँधी पाटी लाइ । सुनु भैया, याके गुन मोसीं, इन मोहिं लयौ बुलाई । दधि मैं पड़ी सेंत कीं मोपैं चीटीं सबै कढ़़ाई । टहल करत मैं याके घर की यह पति सँग मिलि सोई । सूर बचन सुनि हँसी जसोदा, ग्वाल रही मुख गोई ॥५५॥ अर्थ- (गोपियों ने यशोदा से श्रीकृष्ण की शिकायत करते हुये कहा) हे नन्द- रानी (तुम) अपना गांव ले लो । बडे बाप की बेटी हो और पुत्र को बडी अच्छी बात पढा रही हो। वह साथियों की भीड़ लेकर घर मे घुस जाता है। स्वयं खाये तो सहा भी जाये। जब मैं सामने पकड़ने चली तो उस समय के गुणों का वर्णन कहाँ तक कहूँ ? वे मुझे देखकर भागकर कही छिप गये और मैं आकर लेट गयी । धीरे-धीरे उन्होने चोटी पकड़कर पीछे से पाटी में बांध दिया। (तब कृष्ण ने यशोदा से कहा) हे मां, मुझसे इनके गुण सुनो, इन्होने मुझे बुला लिया और दही मे पड़ी हुयी सभी चीटियां मुझसे मुफ्त मे निकलवा ली। मैं इसके घर की रखवाली करता रहा और