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सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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वृन्दावन लीला ८६ मारि भजत जो जाहि ताहि सो, मारत लेत आपनौ दाउ । सूर स्याम के गुन को जानै कहत और कछु और उपाउ ॥२३॥ अर्थ—मित्रों को साथ लेकर कृष्ण खेलते हैं । एक गेंद को मारता है, एक रोकता है, एक अनेक प्रकार के खेल करके भागता है । आपस मे मार करते हुए वे सब बहुत सुखी है । खेलते-खेलते ही कृष्ण सबको यमुना तट पर ले गये । मारकर जो भागता था उसे मारकर (कृष्ण) अपना दांव लेते थे, । सूरदास कहते है कि कृष्ण के गुणों को कौन जानता है, वे कुछ कहते हैं और कुछ अन्य उपाय करते हैं ॥२३॥ स्याम सखा कौं गेंद चलाई । श्रीदामा मुरि अंग बचायौ, गेंद परी कालीदह जाई । धाइ गही तब फेंट स्याम की, देहु न मेरी गेंद मँगाई । और सखा जनि मोकौ जानौ, मोसौँ तुम जनि करौ ढिठाई । जानि-बूझि तुम गेंद गिराई, अब दीन्हैं ही बनै कन्हाई । सूर सखा सब हँसत परस्पर, भली करी हरि गेंद गँवाई ॥२४॥ अर्थ—कृष्ण ने मित्र के ऊपर गेंद फेंका (चलाया) । श्रीदामा ने मुड़कर अङ्ग बचाया जिससे गेंद जाकर कालीदह मे गिर गयी । तब (श्रीदामा) ने दौड़कर कृष्ण की फेंट पकड़ ली (और कहा) मेरी गेंद (यदि) नहीं मँगा देते हो (तो ठीक न होगा) मुझे अन्य सखाओं के समान मत समझो । तुम मुझसे ढीठपन मत करो । तुमने जान- बूझकर गेंद को गिरा दिया अब हे कृष्ण गेंद देने से ही काम बनेगा । सूरदास कहते हैं कि सब मित्र परस्पर हँसते हैं (और कहते हैं) अच्छा किया कृष्ण ने गेंद को गायब कर दिया ॥२४॥ फेंट छांड़ि मेरी देहु श्रीदामा । काहै कौं तुम रारि बढ़ावत, तनक बात कैँ कामा । मेरी गेंद लेहु ता बदलैं, बाँह गहत हौ धाइ । छोटौ बड़ी न जानत काहूँ, करत बराबरी आइ । हम काहे कौँ तुमहिं बराबर, बड़े नंद के पूत । सूर स्याम दीन्है ही बनिहैं, बहुत कहावत धूत ॥२५॥ अर्थ—(कृष्ण कहते हैं) हे श्रीदामा मेरी फेंट छोड़ दो । तुम छोटी-सी बात के लिए क्यों झगड़ा बढ़ाते हो । अपनी गेंद के बदले मेरी गेंद ले लो । तुम दौड़कर बांह (क्यो) पकड़ते हो । किसी को छोटा बड़ा नही समझते हो । (बस) आकर बराबरी करने लगते हो । (श्रीदामा कहते हैं) हम तुम्हारे बराबर कैसे हो सकते हैं (क्योकि तुम) बड़े नंद के पुत्र हो । हे कृष्ण गेंद देने से ही बनेगा (भले ही) तुम बहुत धूर्त कहे जाते हो ॥२५॥ रिस करि लीन्ही फेंट छुड़ाइ । सखा सबै देखत हैं ठाढ़े, आपुन चढ़े कदम पर धाइ ।

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