सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
पृष्ठ 97, कुल 359 में से
संदर्भ में पढ़ें९६ सूरसागर सार सटीक जमुना जू थकित भईँ, नहीं सँभारी। सूरदास मुरली है, तीन-लोक प्यारी ॥४१॥ अर्थ - कृष्ण ने अच्छे राग (मोहक ढंग) से वंशी बजायी । (वंशी) की ध्वनि को सुनकर शंकर का ध्यान टूट गया । ब्रह्मचारी (ब्रह्मा, वेद पढना भूल गये । इस तरह से स्मृति) समाप्त हो गई कि वाणी गुण को कह ही नही सकती । जब तेजी से (मुरली की ध्वनि) सुनाई पडी तब इन्द्र की सभा थकित हो गई । रंभा का गर्व मिट गया (वह) नाचना भूल गयी । यमुना शिथिल हो गई । (वह) होश नही सँभाल पायी । सूरदास कहते हैं कि (कृष्ण की) वंशी तीनो लोक को प्रिय है ॥४१॥ मुरली तऊ गुपालहिं भावति । सुनि री सखी जदपि नंदलालहिं, नाना भाँति नचावति । राखति एक पाइ ठाढ़ौ करि, अति अधिकार जनावति । कोमल तन आज्ञा करवावति, कटि टेढ़ी ह्वै आवति । अति अधीन सुजान कनीड़े, गिरिधर नार नवावति । आपुन पौंढ़ि अधर सज्जा कर, पर पल्लव पलुटावति । भृकुटी कुटिल, नैन नासा-पुट, हम पर कोप करावति । सूर प्रसन्न जानि एकौ छिन, धर तैं सीस डुलावति ॥४२॥ अर्थ-(एक सखी दूसरी सखी से कहती है) मुरली तब भी कृष्ण को अच्छी लगती है । सुनो सखी यद्यपि वह नन्दलाल को अनेक भाँति से नचाती है। (उन्हे) एक ही पैर पर खड़ा करके रखती है और (अपना) अत्यधिक अधिकार जनाती है । (कृष्ण के) कोमल तन से आज्ञा (का पालन) करवाती है (इसी से कृष्ण की) कमर टेढी हो आती है । अत्यधिक आधीन तथा कृपा से दबे हुए सुजान कृष्ण की गरदन को झुक- वाती है । स्वयं (कृष्ण के) ओठ रुपी सेज पर लेट कर पल्लव सदृश हाथ से पैर दबवाती है। भौंहे, नेत्र, नथुने कुटिल करके हम पर क्रोध करवाती है । सूरदास कहते हैं कि (गोपी कहती हैं) कृष्ण को एक भी क्षण प्रसन्न जानकर धड से सिर हिलवाती है ॥४२॥ अधर-रस मुरली लूटन लागी । जा रस कौं षटरितु तप कीन्हीं, सो रस पियति सभागी । कहाँ रही, कहँ तैं यह आई, कौनैं याहि बुलाई ? चक्रित भई कहतिं ब्रजबासिनि यह तौ भली न आई । सावधान क्यौं होतिं नहीं तुम, उपजी बुरी बलाई । सूरदास प्रभु हम पर ताकौं, कीन्हौ सौति बजाई ॥४३॥ अर्थ - मुरली (कृष्ण के) ओठो का रस लूटने लगी । जिस रस के लिए (हम व्रज बालाओ ने) छहो ऋतुओं मे तप किया, उसी रस को भाग्यशाली (वंशी) पीती है । (यह) कहाँ थी, कहाँ से आ गयी, इसे किसने बुलाया । (ऐसा) कहती हुई ब्रज-