भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 108

स्पष्टाधिकार ८५ चित्र १६ यदि सूर्य बिम्ब प्रतिदिन बेध करके देखा जाय ता प्रतिदिन वह एक ही आकार का नहीं देख पड़ता । जब सूर्य धनु राशि के कोई १६° पर होता है (३ जनवरी को) तब उसका बिम्ब सबसे बड़ा देख पड़ता है। इस दिन इसके बिम्ब का मान ३२′३५.२″ होता है। इसी दिन इसकी दैनिक स्पष्ट गति भी तीव्रतम अर्थात् ६१′६.६″ होती है । इसके बाद शनैः-शनैः सूर्य बिम्ब छोटा होता जाता है और गति मंद होती जाती है । जब सूर्य मिथुन राशि के कोई १६° पर होता है अर्थात् पहले स्थान से १८०° बढ़ जाता है तब बिम्ब सबसे छोटा अर्थात् ३१′३०.७″ का होता है और दैनिक स्पष्ट गति मन्दतम अर्थात् ५७′११.५″ हो जाती है । बिम्ब के छोटा-बड़ा देख पड़ने का कारण यह तो नहीं है कि सूर्य का आकार ही वास्तव में छोटा-बड़ा हो जाता है वरन् यह है कि सूर्य की दूरी ही घटती-बढ़ती रहती है । यह मत हमारे सिद्धान्तों का भी है। १ यदि सूर्य बिम्ब के अर्द्धव्यास का मान स हो और पृथ्वी से सूर्य की निकटतम दूरी क हो तो सूर्य के अर्द्ध बिम्ब से जो कोण पृथ्वी पर बनेगा उसकी ज्या = स/क परन्तु इस दिन सूर्य का बिम्ब ३२′३५.२″ होता है, इसलिए अर्द्धबिम्ब १६′१७.६″ होगा, इसलिए ज्या १६′१७.६″ = स / क परन्तु जब कोण बहुत छोटा होता है तब कोण और कोण की ज्या के मानों में कोई अन्तर नहीं होता जब कि कोण का मान Circular measure में हो या ज्या क मान भारतीय रीति से लिखा जाता हो ! २ १. सूर्यसिद्धान्त चन्द्र ग्रहणाधिकार श्लोक १ - ३ २. मध्यमाधिकार के ६० - ६१ श्लोकों का विज्ञान भाष्य देखो ।