भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१२० सूर्य-सिद्धान्त


पिंडों का क्रमधनु अथवा कोणभारतीय रीति से ज्या के मान जब त्रिज्या = ३४३८आजकल की रीति से ज्या के मान जब त्रिज्या = ३४३८आजकल की रीति से ज्या के मान जब त्रिज्या = १भारतीय रीति से उत्क्रम ज्या के मान जब त्रिज्या = ३४३८आजकल की रीति से उत्क्रम ज्या के मान जब त्रिज्या = १
३°४५'२२५२२४.८५.०६५४.००२२
७°३०'४४६४४८.६५.१३०५२६.००८६
११°१५'६७१६७०.७२.१९५१६६.०१९२
१५°८९०८८६.८२.२५८८११७.०३४१
१८°४५'११०५११०५.०१.३२१४१८२.०५३१
२२°३०'१३१५१३१५.०५.३८२७२६१.०७६१
२६°१५'१५२०१५२०.५८.४४२३३५४.१०३१
३०°१५'१७१६१७१६.००.५०००४६०.१३४०
३३°४५'१६१०१६१०.०५.५५५५५७६.१६८५
१०३७°३०'२०६३२०६३.०५.६०८८७१०.२०६६

* देखिये चित्र १ = पृष्ठ १६६ 'विज्ञान' भाग १८ संख्या ५