भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१२४ सूर्य-सिद्धान्त किसी समकोण गोलीय त्रिभुज के समकोण को छोड़कर, समकोण बनाने वाली दो भुजाओं, कर्ण के पूरक, तथा अन्य दो कोणों के पूरकों को त्रिभुज के गोल खंड (circular parts) कहते हैं । इस प्रकार किसी समकोण गोलीय त्रिभुज के ५ गोल खंड होते हैं । यह पाँचों खंड एक वृत्त के चारों ओर उसी क्रम से रखे जाते हैं जिस क्रम से रखे जाते हैं । जिस क्रम से यह त्रिभुज में रहते हैं । मान लो अ इ उ एक चित्र २६ गोलीय त्रिभुज है । अ, इ, उ, वह बिन्दु हैं जिन पर त्रिभुज की भुजें इ अ, उ अ; अ इ, उ इ; और अ उ, इ उ मिलती हैं । उ अ इ, अ इ उ और अ उ इ कोणों को संक्षेप में अ, इ, उ अक्षरों से प्रकट करते हैं । इसी तरह अ कोण के सामने वाले भुज इ उ को 'आ' से, इ कोण के सामने वाले भुज अ उ को ई से और उ कोण के सामने वाले भुज अ इ को ऊ से प्रकट करते हैं । साधारण नियम यह है कि त्रिभुज के कोणों को ह्रस्व स्वरों से और उनके सामने के भुजों का उसी प्रकार के दीर्घ स्वरों से प्रकट किया जाता है । गोलीय त्रिभुज के भुजों को भी कोणात्मक मानों से ही नापते हैं । यदि इ समकोण हो तो यह त्रिभुज समकोण गोलीय त्रिभुज कहा जाता है । तब इसके सामने के भुज ई को कर्ण कहते हैं । [ देखिये चित्र २६ ] नेपियर के नियम में समकोण गोलीय त्रिभुज के समकोण को छोड़कर इसके पास वाले दो भुज आ, ऊ, अ कोण का पूरक π/२ - अ, ई कर्ण का पूरक π/२ - ई, उ कोण का पूरक π/२ - उ, गोलीय खंडों को चित्र द्वारा इस प्रकार लिखते हैं [ देखिये चित्र २७ ]