भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१४४ सूर्य-सिद्धान्त दूसरा संस्कार युक्त मध्यम ग्रह = पहला संस्कार युक्त मध्यम ग्रह ± पहला मन्द फल २ = मध्यम ग्रह ± पहला शीघ्र फल ± पहला मन्द फल (४) २ २ दूसरा संस्कृत मन्द केन्द्र = मन्दोच्च — दूसरा संस्कार युक्त मध्यम ग्रह = मन्दोच्च (मध्यम ग्रह ± पहला शीघ्र फल ± पहला मन्द फल) २ २ = (मन्दोच्च — मध्यम ग्रह) ∓ पहला शीघ्र फल ∓ पहला मन्द फल २ २ = (मन्द केन्द्र ± पहला शीघ्र फल) ± पहला मन्द फल २ २ = प्रथम संस्कृत मन्द केन्द्र ∓ पहला मन्द फल (५) २ जिससे सिद्ध हुआ कि दूसरा संस्कृत मन्द केन्द्र जानने के लिए प्रथम संस्कृत मन्द केन्द्र में पहले मन्द फल का आधा चिह्न उलट कर जोड़ दो । इसलिए समीकरण (४) की भी आवश्यकता नहीं है। दूसरे संस्कृत मन्द केन्द्र से जो मन्द फल बनाया जायगा वही दूसरा मन्द फल है । मन्द स्पष्ट ग्रह = मध्यम ग्रह ± दूसरा मन्द फल (६) दूसरा शीघ्र केन्द्र = शीघ्रोच्च — मन्द स्पष्ट ग्रह = शीघ्रोच्च — (मध्यम ग्रह ± दूसरा मन्द फल) == (शीघ्रोच्च — मध्यम ग्रह) ∓ दूसरा मन्द फल = शीघ्र केन्द्र ∓ दूसरा मन्द फल (७) इससे सिद्ध हुआ कि दूसरा शीघ्र केन्द्र जानने के लिए, शीघ्र केन्द्र में दूसरा मन्द फल चिह्न उलट कर जोड़ दो । इसलिए समीकरण (६) की भी आवश्यकता नहीं है। दूसरे शीघ्र केन्द्र से जो शीघ्र फल बनेगा वही दूसरा शीघ्र फल है ।