सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १५६ ' उदाहरण—सूर्य और गुरु की स्पष्ट दैनिक गति (१६७६ वि० की वसंत पंचमी की अर्द्धरात्रि को) निकालना । सूर्य की मध्यम दैनिक गति ५६' ८" है । इसलिए समीकरण (४) के अनुसार [देखो उदा० १] सूर्य की स्पष्ट दैनिक गति = ५६' ८" ± (८३३ / २१६००) × (२१० / २२५) × ५६' ८" (यहाँ मन्द केन्द्र दूसरे पद में है इसलिए धन चिह्न लेने से) = ५६' ८" + (८३३ / २१६००) × (२१० / २२५) × ५६' ८" = ५६' ८" + २' ७".७ = ६१' १६" स्वल्पान्तर से गुरु की मध्यम दैनिक गति = ४' ५६" गुरु की मन्द स्पष्ट गति = ४' ५६" ± (१६४८ / २१६००) × (१६१ / २२५) × ४' ५६" यहाँ मंद केन्द्र चौथे पद में है इसलिए ऋण चिह्न लेना चाहिए । ∴ गुरु की मंद स्पष्ट गति = ४' ५६" - (१६४८ / २१६००) × (१६१ / २२५) × ५' = ४' ५६" - २५" = ४' ३४" गुरु के शीघ्रोच्च की गति = सूर्य की मध्यम गति = ५६' ८" । शीघ्र कर्ण = ३६०८ इसलिए इन सब मानों को समीकरण (५) में उत्थापन करने से और धनात्मक चिह्न लेने से क्योंकि शीघ्रकर्ण त्रिज्या से अधिक है, गुरु की स्पष्ट गति = ४' ३४" + ((५६' ८" - ४' ३४") (३६०८ - ३४३८)) / ३६०८ = ४' ३४" + (५४' ३४" × १७०) / ३६०८ = ४' ३४" + २' ३४" = ७' ८"