सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १६३ क्षेत्रफल अ र ग = ------------------- πत² परन्तु अ र ग का क्षेत्रफल = क्षेत्रफल अ क ग — क्षेत्रफल र क ग = त² / २ उ — बगा ✕ कर / २ = त.² उ / २ — त.ज्याउ ✕ त.च / २ = त² / २ (उ — च ज्या उ) यहाँ च दीर्घ वृत्त की केन्द्र-च्युति (eccentricity) है । पहले सिद्ध किया गया है कि क्षेत्रफल अ र ग / दीर्घवृत्त का क्षेत्रफल = द. भ / २π ∵ द. भ / २π = [ त² / २ (उ — च ज्या उ) ] / πत² या भ. द = उ — च ज्या उ (१) यह समीकरण मध्यम मन्द केन्द्र और उत्केन्द्र का सम्बन्ध प्रकट करता है । स्पष्ट केन्द्र और उत्केन्द्र का सम्बन्ध स्थापित करना :— दीर्घवृत्त का ध्रुवीय समीकरण (Polar equation) है, रग = त (१ — च²) / (१ + च कोज्या स) जहाँ रग, र नाभि से ग ग्रह का अन्तर है । परन्तु दीर्घवृत्त की परिभाषा के अनुसार, रग = च ✕ नियामक रेखा (directrix) से ग का अन्तर = च ✕ ब से नियामक रेखा का अन्तर = च ✕ (केन्द्र से नियामक रेखा का अन्तर — केन्द्र से ब का अन्तर) = च ✕ (त / च — बक) = च ✕ (त / च — त कोज्या उ) = त — च ✕ त कोज्या उ ∵ कर्ण = त (१ — च कोज्या उ) (२)