सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १६७ यदि √१ + च - √१ - च ───────────── के स्थान पर प रखा जाय √१ + च + √१ - च तो इस समीकरण का रूप होगा इ^{स√-१} = इ^{उ√-१} - प ──────────── १ - इ^{उ√-१} × प १ - प / इ^{उ√-१} = ───────────── × इ^{उ√-१} १ - प × इ^{उ√-१} = इ^{उ√-१} × १ - प इ^{-उ√-१} ────────────── १ - प इ^{उ√-१} प्रत्येक पक्ष का लघुरिक्त (logarithm) लेने से, लरि इ^{स√-१} = लरि इ^{उ√-१} + लरि (१ - प इ^{-उ√-१}) - लरि (१ - प इ^{उ√-१}) (घ) परन्तु लरि (१ - प इ^{उ√-१}) = - प इ^{उ√-१} - (प इ^{उ√-१})² (प इ^{उ√-१})³ (प इ^{उ√-१})⁴ ─────────── - ─────────── - ─────────── - ...... २ ३ ४ और लरि (१ - प इ^{-उ√-१}) = - प इ^{-उ√-१} - (प इ^{-उ√-१})² (प इ^{-उ√-१})³ ──────────── - ──────────── - ......... २ ३ पहले को दूसरे में से घटाने पर, प (इ^{उ√-१} - इ^{-उ√-१}) + प² × ── २ (इ^{२√-१ उ} - इ^{-२√-१ उ}) + प³ ── ३