भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१७४ सूर्य सिद्धान्त $=\frac{१}{८} (६^३ ज्या ६ म - ४^४ ज्या ४ म + ७ \times २^३ ज्या २म)$ $\because ज्या २ उ = ज्या २म + च (ज्या३म - ज्याम)$ $+\frac{च^२}{२} (२ ज्या ४ म - २ ज्या २ म)$ $+\frac{च^३}{\underline{\vert ३}} \times \frac{१}{४} (२५ ज्या ५ म - २७ ज्या ३म + ४ ज्याम)$ $+\frac{च^४}{\underline{\vert ४}} \times \frac{१}{८} (२१६ ज्या ६ म - २५६ ज्या ४ म$ $+ ५६ ज्या २ म) + \dots\dots\dots\dots$ $= \left( -च + \frac{च^३}{६} \right) ज्या म + \left( १ - च^२ + \frac{७च^४}{२४} \right) ज्या२ म$ $+ \left( च - \frac{६च^३}{८} \right) ज्या ३ म + \left( च^२ - \frac{४च^४}{३} \right) ज्या ४ म$ $+ \frac{२५ च^३}{२४} ज्या ५ म + \dots\dots\dots$ यदि फि $(उ) = ज्या३ उ$ तो फि $(म) = ज्या ३ म$ और फि$'(म) = ३$ कोज्या ३ म, इसलिए लैग्रेंज के सिद्धान्त के अनुसार, ज्या ३ उ $=$ ज्या ३ म $+$ च ज्या म $\times$ ३ कोज्या ३ म $+\frac{च^२}{\underline{\vert २}} \frac{ता}{ताम} {ज्या^२ म \times ३ कोज्या ३ म}$ $+\frac{च^३}{\underline{\vert ३}} \frac{ता^२}{ताम^२} {ज्या^३ म \times ३ कोज्या ३ म} + \dots\dots$ $= ज्या ३ म + \frac{३}{२} च (ज्या ४ म - ज्या २ म) + \frac{च^२}{२} \times \frac{३}{४}$ $(५ ज्या ५ म - ६ ज्या ३ म + ज्या म)$ $+\frac{च^३}{६} \times \frac{३}{८} (३६ ज्या ६ म - ४८ ज्या ४ म + १२ ज्या २ म) + \dots$ $= \frac{३च^२}{८} ज्या म - \left( \frac{३च}{२} - \frac{३च^३}{४} \right) ज्या २ म$ $+ \left( १ - \frac{६च^२}{४} \right) ज्या ३ म$

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