सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १७७ $+\left(\frac{३ च^२}{८}-\frac{२७ च^४}{११\tau}\right) ज्या ३ म+\left(\frac{च^३}{३}-\frac{४ च^५}{१५}\right)\times ज्या ४ म$ $+\frac{१२५ च^५}{३८४} ज्या ५ म+\cdots\cdots]$ $+\frac{३}{२}\left(\frac{च^२}{४}+\frac{च^४}{८}+\frac{५ च^६}{६४}\right)\left[\left(-च+\frac{च^३}{६}\right)ज्या म$ $+\left(१-च^२+\frac{७ च^४}{२४}\right)ज्या २ म$ $+\left(च-\frac{६च^३}{८}\right)ज्या ३ म+\left(च^२-\frac{४च^४}{३}\right)\timesज्या ४ म$ $\left.+\frac{२५च^३}{२४} ज्या ५ म+\cdots\cdots\right]$ $+\frac{३}{२}\left(\frac{च^३}{८}+\frac{३च^५}{३२}\right)\left[\frac{३च^२}{८}ज्या म-\left(\frac{३च}{२}-\frac{३च^३}{४}\right)\timesज्या २ म$ $+\left(१-\frac{६च^२}{४}\right)ज्या ३ म+\left(\frac{३च}{२}-३च^३\right)\timesज्या ४ म$ $\left.+\frac{१५च^२}{८}ज्या ५म+\frac{६च^३}{४} ज्या ६ म+\cdots\cdots\right]$ $+\frac{१}{६}\left(\frac{च^४}{१६}+\frac{च^६}{१६}\right)\left[च^२ ज्या २ म-२ च ज्या ३ म$ $+\left(१-४च^२\right)ज्या ४ म+२ च ज्या ५ म ]$ $\left.+\frac{१}{२}\times\frac{च^५}{३२}\left[-\frac{५च}{२} ज्या ४ म+ज्या ५ म+\frac{५च}{२} ज्या ६ म\right]\right}$ स के इस मान में ज्या ६ म के आगे के पद तथा वह सब पद जिनके गुणक च६ या उससे अधिक हैं छोड़ दिये गये हैं क्योंकि इससे कोई विशेष अशुद्धि नहीं हो सकती। इस मान को सरल करने पर ऐसे पद भी मिलेंगे जिनके गुणक च६ से अधिक हैं। इनको भी छोड़ देने तथा ज्या म, ज्या २ म इत्यादि के गुणक एकत्र करने पर स $=$ म $+\left(२च-\frac{१}{४}च^३+\frac{५}{६६}च^५\right)ज्या म$ $+\left(\frac{५}{४}च^२-\frac{११}{२४}च^४+\frac{१७}{१६२}च^६\right)ज्या २ म$ १२