सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६० सूर्य-सिद्धान्त
रीति से जाने गये कालों से कभी-कभी १४, १५ घड़ी आगे पीछे रहते हैं । यह बात बापूदेव शास्त्री के पंचांग और काशी के मकरंद सारिणी से बनाये गये पंचांगों से भी प्रकट हो सकती है । न्यूटन ने इसका कारण जिस तरह समझाया है वह संक्षेप में* यह है :— चंद्रमा और पृथिवी की कक्षाओं के बीच का कोण केवल ५° के लगभग है इसलिए दोनों को एक ही धरातल में मान लेने से विशेष हानि नहीं होगी परन्तु सरलता आ जायगी । मान लो र सूरज, प पृथ्वी और च१ च२ च३ च४ चंद्रमा की कक्षा हैं । यहाँ यह न भूल जाना चाहिये कि प र, अर्थात् सूर्य से पृथिवी का अंतर प च, अर्थात् पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी का कोई ४०० गुना है । यह भी समझे रहना आवश्यक है कि चंद्रमा का विचलन इसलिए होता है कि सूर्य पृथिवी और चंद्रमा दोनों को असमान रूप से आकर्षित कर रहा है इसलिए इन दोनों के आकर्षण के अंतर के कारण यह विचलन हो रहा है । यदि यह अंतर न होता अर्थात् सूर्य का आकर्षण चंद्रमा और पृथ्वी पर समान होता तो विचलन कदापि न होता क्योंकि तब तो दोनों साथ ही साथ आगे पीछे होते और चंद्रमा की सापेक्ष गति में भिन्नता न पड़ती । चित्र ३६ से यह स्पष्ट है कि जब तक चंद्रमा च४ से च१ होता हुआ च२ तक चलता है तब तक यह पृथिवी की अपेक्षा सूर्य के निकट रहता है अर्थात् कृष्ण-पक्ष की अष्टमी से लेकर शुक्ल पक्ष की अष्टमी तक चंद्रमा पृथिवी की अपेक्षा सूर्य के निकट रहता है और शुक्ल पक्ष की अष्टमी से कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक चंद्रमा पृथ्वी की अपेक्षा सूर्य से दूर रहता है । इसलिए आकर्षण सिद्धान्त के अनुसार पहली दशा में सूर्य का आकर्षण चंद्रमा पर अधिक होता है अर्थात् सूर्य की ओर अधिक खिंचने के कारण चंद्रमा पृथ्वी से कुछ दूर हो जाया करता है जिससे जान पड़ता है कि विचालक शक्ति (perturbing force) चंद्रमा को पृथ्वी से दूर खींचे जा रही है । चूंकि र बहुत दूर है इसलिए यह शक्ति प र के प्रायः समानान्तर दिशा में र की ओर काम कर रही है । दूसरी दशा में पृथ्वी अधिक खिंचती है, इसलिए चंद्रमा पीछे रह जाता है जिससे जान पड़ता है कि विचालक शक्ति सूर्य से विरुद्ध दिशा में चंद्रमा को धक्का देकर पृथ्वी से दूर कर रही है । यह पहले ही कहा गया है कि सूर्य बहुत दूर है इसलिए विचालक शक्ति चंद्रमा को प र के समानान्तर दिशा में र से दूर ढकेले जा रही है । इसलिए यह सिद्ध है कि यह शक्ति चंद्रमा और पृथ्वी को सदैव परस्पर दूर कर रही है, प र के प्रायः समानान्तर काम कर रही है, और इसका प्रभाव उस
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