सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १६६ इसी प्रकार मंगल और शनि के भी शर जाने जा सकते हैं । बुध और शुक्र के लिए कुछ भिन्नता करनी पड़ती है अर्थात् इनका विक्षेप केन्द्र जानने के लिए इनके पातों में दूसरे मंद फल का जो तीसरे कर्म में काम आता है उलटा संस्कार करके शीघ्रोच्चों के स्थानों में से घटाना पड़ता है । इसके बाद जो कुछ करना पड़ता है वह उपर्युक्त रीति की तरह होता है । चंद्रमा का स्पष्ट शर जानने के लिए यह सब झंझट करने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि इसमें शीघ्र कर्म का संस्कार नहीं करना पड़ता । इसलिए इसके लिए वही नियम लागू है जो २८ वें श्लोक में सूर्य के लिए बतलाया गया है, अर्थात् चंद्रमा के विक्षेप केन्द्र (राहु से स्पष्ट चंद्र का अन्तर) की ज्या को चंद्रमा के परम विक्षेप अर्थात् ४° ३०' से गुणा करके ३४३८ कला से जो त्रिज्या का मान है भाग दें तो चंद्रमा का स्पष्ट शर ज्ञात हो जायगा । यदि विक्षेप केन्द्र १८०° से कम हो तो उत्तर शर होगा अन्यथा दक्षिण शर (देखो श्लोक ७ और उसका विज्ञान भाष्य तथा पृष्ठ २२ का चित्र ४) । पृष्ठ १२२ चित्र २५ में व को राहु का स्थान, व प को क्रान्तिवृत्त और व स को चंद्र कक्षा मान लिया जाय तो स प चंद्रमा का उत्तर शर होगा । विक्षेपापक्रमैकत्वे क्रान्तिर्विक्षेप संयुता । दिग्भेदे वियुता स्पष्टाभास्करस्य यथागता ॥५८॥ अनुवाद—(५८) किसी ग्रह की स्पष्ट क्रान्ति जानने के लिए उस ग्रह के स्पष्ट शर (विक्षेप) को उसी ग्रह की (मध्यम) क्रान्ति में जोड़ दो यदि शर और क्रान्ति दोनों एक ही प्रकार हों, अर्थात् यदि शर और क्रान्ति दोनों उत्तर हों या दोनों दक्षिण हों । परन्तु यदि इनकी दिशाओं में भिन्नता हो तो इन दोनों का जो अन्तर होगा वही स्पष्ट क्रान्ति होगी । सूर्य की स्पष्ट क्रान्ति जानने के लिए जो नियम पहले (२८वें श्लोक में) बतलाया गया है वही पर्याप्त है (क्योंकि सूर्य्य क्रान्ति-वृत्त पर ही भ्रमण करता है) । विज्ञान भाष्य—स्पष्ट ग्रह से क्रान्ति वृत्त का जो अन्तर कदम्ब-प्रोत-वृत्त पर होता है उसे उस ग्रह का स्पष्ट विक्षेप कहते हैं (देखो पृष्ठ २२ मध्य० तथा श्लोक ७, ८) और स्पष्ट ग्रह से विषुवद् वृत्त का जो अन्तर ध्रुव प्रोत वृत्त पर होता है उसे उस ग्रह की स्पष्ट क्रान्ति कहते हैं । चित्र ३६ में व द श उ क्रान्तिवृत्त, व दा श ऊ विषुवद् वृत्त, क कदम्ब (क्रान्तिवृत्तीय ध्रुव) और ध ध्रुव है । ग किसी ग्रह का स्थान अपने कक्षा- वृत्त में है जो चित्र में सरलता के विचार से नहीं दिखाया गया है। ग्रह इस समय