सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१६ सूर्य-सिद्धान्त या २१६०० कला अश्विनी से आगे चल चुकते हैं तब २७वां योग बीतता है। फिर पहले योग का आरंभ होता है। २७ योगों के नाम यह हैं:-- १ विष्कम्भ १० गंड १६ परिघ २ प्रीति ११ वृद्धि २० शिव ३ आयुष्मान् १२ ध्रुव २१ सिद्ध ४ सौभाग्य १३ व्याघात २२ साध्य ५ शोभन १४ हर्षण २३ शुभ ६ अतिगंढ १५ वज्र २४ शुक्ल ७ सुकर्मा १६ सिद्धि २५ ब्रह्मा ८ धृति १७ व्यतीपात २६ इन्द्र या ऐन्द्र ९ शूल १८ वरीयान् २७ वैधृति नियम समझने के लिए एक उदाहरण पर्याप्त होगा। मान लो यह जानना है है कि सम्बत् १६८१ वि० की मेष संक्रान्ति के दिन कौन योग वर्तमान था, उसका किस समय आरंभ और किस समय अंत हुआ ? पहले मेष संक्रान्ति के दिन के सूर्य और चंद्रमा के स्थान तथा दैनिक गतियां स्पष्ट करनी पड़ेंगी। कलियुग के आरंभ से १६८१ वि० की स्पष्ट मेष संक्रान्ति के समय तक ५०२५ सौर वर्ष तथा १८,३५,४२३.०८०६२५ मध्यम सावन दिन होते हैं। कलियुग का आरंभ उज्जैन में गुरु का मध्य रात्रि से हुआ, इसलिए उज्जैन में शनिवार की मध्य रात्रि के .०८०६२५ दिन उपरान्त १६८१ वि० की मेष संक्रान्ति हुई। सुविधा, के लिए मध्य रात्रि के समय के सूर्य और चंद्रमा स्पष्ट करना अच्छा होगा। जिस रीति से सूर्य का स्पष्ट स्थान निकाला गया है उसी तरह सूर्य और चन्द्रमा दोनों को स्पष्ट करना चाहिये । गणना का सार यह है :-- सूर्य का स्थान चंद्रमा का स्थान दोनों का योगफल शनिवार (मध्य रात्रि) ३५६°५५′१६″ ९८°३८′५३″ ९५°३४′६″ रविवार (मध्य रात्रि) ०°५३′५६″ १०८°१६′५६″ १०९°१०′५५″ दैनिक गति ५८′४३″ १२°३८′३″ १३°३६′४६″ पहला योगफल ३६०° से अधिक हो जाता है इसलिए ३६०° छोड़ दिया गया और ९५°३४′६″ ले लिया गया अब ९५°३४′६″ = ५७३४′६″