भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार २४५ कर लेती है जिसके कारण वसंत-सम्पात प्रति सायन* वर्ष ५०.३ विकला के लगभग विलोम दिशा में खसकता जाता है । चित्र ५२ और ५३ में समानता दिखाने के लिए कई अक्षर एक से हैं । चित्र ५२ में पृथ्वी लट्टू की तरह है, अ इसका सौराकर्षण केन्द्र है, घ धा लट्टू का अक्ष है और यदि क से स अ के समानान्तर रेखा खींची जाय तो यह घ क के समान होगी । जो कुछ सूर्य के सम्बन्ध में कहा गया है वही चंद्रमा के लिए भी लागू होता है । चंद्रमा का प्रभाव सूर्य के प्रभाव के दूने से कुछ अधिक होता है क्योंकि चन्द्रमा पृथ्वी के बहुत पास है । सूर्य और चंद्रमा में से प्रत्येक का प्रभाव उस समय सबसे अधिक होता है जिस समय इनकी उत्तर या दक्षिण क्रांति सबसे अधिक होती है । जिस समय यह विषु- वद्वृत्त पर होते हैं उस समय इनका प्रभाव शून्य होता है। परन्तु ग्रहों का उलटा प्रभाव भी वसंत संपात की गति पर पड़ता है । ग्रह सम्बन्धी विचलन का परिमाण प्रति वर्ष ०.११ विकला पूर्व की ओर होता है । ग्रहों के कारण वसंत सम्पात में ही विचलन नहीं होता वरन् पृथ्वी की कक्षा भी विचलित होती है जिससे क्रान्तिवृत्त का तल डगमगा जाता है तथा क्रान्तिवृत्त और विषुवद्वृत्त के बीच का कोण (परम अपक्रम) प्रतिवर्ष आधा विकला के लगभग कम होता जा रहा है। परन्तु यह कभी एक सीमा के भीतर ही, अर्थात् मध्यम स्थान से १ १/३ अंश कम या अधिक होती है । अभी तक बतलाया गया है कि सौर चान्द्र अयन चलन के कारण आकाशीय ध्रुव कदम्ब की परिक्रमा एक वृत्त पर कर रहा है। परन्तु यह कुछ स्थूल है। इसका कारण यह है कि चन्द्रमा सदैव क्रान्तिवृत्त पर नहीं रहता वरन् इससे ५ अंश के लगभग उत्तर या दक्खिन हो जाता है तथा इसका पात (राहु) प्रायः १८ वर्ष में एक *वसंत सम्पात विन्दु से चल कर जितने समय में सूर्य फिर वसंत सम्पात विन्दु पर आ जाता है उतने समय को सायन वर्ष (tropical year) कहते हैं । यह ३६५.२४२२१६ मध्यम सावन दिन के समान होता है । क्रान्तिवृत्त के एक विन्दु से चल कर जितने समय में सूर्य फिर उसी विन्दु पर आ जाता है उसे नाक्षत्र सौर वर्ष (Sidereal year) कहते हैं । यह ३६५.२५६३७४ मध्यम सावन दिन के समान होता है । यही रवि या पृथ्वी का शुद्ध भगणकाल भी कहलाता है । (देखो मध्यमाधिकार पृष्ठ २०) सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार रवि का जो भगणकाल है वही (३६५.२५८७५६ मध्यम सावन दिन) । सौर वर्ष हमारे यहाँ माना जाता है । (देखो मध्याधिकार पृष्ठ २०)