भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 290, कुल 838 में से

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त्रिप्रश्नाधिकार २६७ सूर्य सायन मकरादि में है इसलिए इस भोगांश को १२ राशि या ३६०° से घटाने पर जो आवेगा वह सूर्य का स्पष्ट सायन भोगांश होगा । इसलिए इस दिन सूर्य का सायन भोगांश = ३६०° - ४४°४८' = ३१५° १२' पृष्ठ २०० के चित्र ३६ को देखने से तथा अनुभव से भी यह स्पष्ट है कि सूर्य जितने समय में वसंत संपात से दक्षिणायन बिंदु तक जाता है अर्थात् सायन मेष से तीन राशि तक जाता है उतने समय में इसकी उत्तर क्रान्ति शून्य से २३°२७' तक बढ़ती है। जब सूर्य दक्षिणायन बिंदु से (सायन कर्क के आदि से) शरद सम्पात तक जाता है तब इसकी उत्तर क्रान्ति २३°२७' से घटते-घटते शून्य हो जाती है । शरद सम्पात् अर्थात् सायन तुला से उत्तरायण बिंदु (सायन मकर के आरंभ तक) सूर्य की दक्षिण क्रान्ति शून्य से २३°२७' बढ़ती रहती है और सायन मकर के आरम्भ से वसन्त सम्पात तक घटते-घटते फिर शून्य हो जाती है । ऊपर भोगांश निकालने का जो नियम बतलाया गया है उससे केवल यह जाना जाता है कि वसंत या शरद सम्पात से सूर्य कितनी दूर है। यदि सूर्य वसंत संपात अर्थात् सायन मेष से तीन राशियों के बीच में है तो आया हुआ भोगांश वसंत संपात से ही सूर्य की दूरी है, इसलिए यही सायन भोगांश हुआ । यदि सूर्य सायन कर्क के आरम्भ से तीन राशियों के भीतर है तो आया हुआ भोगांश शरद सम्पात से विलोम दिशा में सूर्य की दूरी है। परन्तु शरद सम्पात सायन मेष से ६ राशि दूर है इसलिए ६ राशि में से आया हुआ भोगांश घटाना पड़ता है तब वसंत सम्पात से सूर्य का सायन भोगांश निकलता है। यदि सूर्य सायन तुला से तीन राशियों के बीच में है तो आया हुआ भोगांश शरद सम्पात से अनुलोम दिशा में सूर्य की दूरी है इसलिए ६ राशि में यह जोड़ना पड़ता है तब सूर्य का वसंत सम्पात से सायन भोगांश निकलता है। और यदि सूर्य सायन मकर से तीन राशियों के बीच में है तो आया हुआ भोगांश वसंत संपात से विलोम दिशा में सूर्य की दूरी है। इसलिए १२ राशियों में से इस भोगांश को घटाने पर वसंत संपात से अनुलोम दिशा में सूर्य की दूरी (भोगांश) आती है। ऊपर बतलाया गया है कि सूर्य की परमक्रान्ति वर्ष में आधी विकला के लगभग घटती जा रही है। यहाँ वह सूत्र दे देना अच्छा होगा जिससे किसी समय परमक्रान्ति सहज ही जानी जा सकती है।

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