भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार २७५ परन्तु दिगंश अग्रा का, ध्रुवांतर क्रान्ति का और लम्बांश अक्षांश का पूरक है, इसलिए ज्या (अग्रा) = $\frac{ज्या (क्रान्ति) - कोज्या (नतांश) \times ज्या (अक्षांश)}{ज्या नतांश \times कोज्या अक्षांश}$ (ग) = $\frac{ज्या (क्रान्ति)}{ज्या (नतांश) \times कोज्या (अक्षांश)} - कोटि स्पर्शरेखा (नतांश) \times$ स्पर्श रेखा (अक्षांश) (घ) परन्तु स्पर्शरेखा (अक्षांश) = $\frac{पलभा}{१२}$ कोटि स्पर्शरेखा (नतांश) = $\frac{१२}{छाया}$ ज्या (नतांश) = $\frac{छाया}{छायाकर्ण}$ $\therefore$ ज्या (अग्रा) = $\frac{ज्या (क्रान्ति)}{कोज्या (अक्षांश)} \times \frac{छायाकर्ण}{छाया} - \frac{१२}{छाया} \times \frac{पलभा}{१२}$ = $\frac{१}{छाया} \frac{क्रान्ति ज्या \times छायाकर्ण}{अक्षांश कोटिज्या} - पलभा \right}$ (६) $\therefore$ छाया $\times$ इष्टकालिक अग्रा ज्या = कर्ण वृत्ताग्रा - पलभा [देखो समीकरण (४)] परन्तु छाया $\times$ इष्टकालिक अग्रा ज्या = इष्टकालिक छाया का भुज, क्योंकि चित्र ४६ में $\angle$ स श पू या $\angle$ छ श भ इष्टकालिक अग्रा है जिसकी ज्या = $\frac{छ भ}{छ श}$ इसलिए छाया $\times$ इष्टकालिक अग्राज्या = श छ $\times \frac{छ भ}{छ श}$ $\therefore$ भुज = कर्ण वृत्ताग्रा - पलभा इस चित्र में सूर्य सममंडल से उत्तर है इसलिए भुज दक्षिण होगा । यदि सूर्य सममंडल के दक्षिण जैसे रा पर हो तो गोलीय त्रिभुज ध ख रा में कोज्या $\angle$ ध ख रा = $\frac{कोज्या (ध रा) - कोज्या (ख रा) \times कोज्या (ध ख)}{ज्या (ख रा) \times ज्या (ध ख)}$

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