सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
पृष्ठ 299, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 299
२७६ सूर्य-सिद्धान्त अथवा कोज्या (६०° + पू ख रा) = कोज्या (ध्रुवांतर) - कोज्या (नतांश) × कोज्या (लम्बांश)
ज्या (नतांश) × ज्या (लम्बांश) ज्या (क्रान्ति) = ------------------------------ - को स्परे (नतांश) × स्परे (अक्षांश) ज्या (नतांश) × कोज्या (अक्षांश) परन्तु कोज्या (६० + ∠ पू ख रा) = - ज्या ∠ पू ख रा = - ज्या (अग्रा) ∴ पहले की तरह
- ज्या (अग्रा) = १ / छाया { कर्ण वृत्ताग्रा - पलभा } अथवा, - छाया × ज्या (अग्रा) = कर्णवृत्ताग्रा - पलभा या, - भुज = कर्णवृत्ताग्रा - पलभा यहां कर्णवृत्ताग्रा से पलभा घटाने पर ऋणात्मक होता है जिससे प्रकट है कि पलभा कर्णवृत्ताग्रा से बड़ी है। सूर्य सममंडल के दक्खिन है इसलिए कर्णवृत्ताग्रा पूर्व पच्छिम रेखा और विषुवद्वृत्ताग्रगा रेखाओं के बीच में होगी और पहला भारतवर्ष में सदैव उत्तर रहता है इसलिए भुज उत्तर होगा । इन दोनों उदाहरणों में सूर्य उत्तर गोल में है अर्थात् इसकी क्रान्ति उत्तर है । यदि सूर्य दक्षिण गोल में हो तो चित्र ५८ की तरह स्थिति होगी । गोलीय त्रिभुज ध ख र में कोज्या ∠ ध ख र = कोज्या (ध र) - कोज्या (ख र) × कौज्या (ध ख)
ज्या (ख र) × ज्या (ध ख) ∴ कोज्या (६०° + अग्रा) = कोज्या (६०° + क्रान्ति) - कोज्या (नतांश)
ज्या (नतांश) × ज्या (लम्बांश)
- ज्या (क्रान्ति) ∴ - ज्या (अग्रा) = ------------------------------ × कोज्या (लम्बांश) ज्या (नतांश) × कोज्या (अक्षांश)
- को स्परे (नतांश) × स्परे (अक्षांश) ∴ पहले की तरह
- ज्या (अग्रा) = १ / छाया { - क्रान्ति ज्या × छायाकर्ण / अक्षांश कोटिज्या - पलभा } = १ / छाया { - कर्णवृत्ताग्रा - पलभा } अथवा - ज्या (अग्रा) × छाया = - कर्णवृत्ताग्रा - पलभा या, - भुज = - कर्णवृत्ताग्रा - पलभा