भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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मध्यमाधिकार ७ जितने समय में १ पल अथवा ४ तोला जल एक विशेष नाप के छिद्र द्वारा घटिका १ यंत्र में चढ़ता है उस समय को पल कहते हैं । त्रुटि की कल्पना भास्कराचार्य जी ने २ इस प्रकार की है । जितने समय में पलक गिरती है उसको निमेष कहते हैं । १ निमेष के तीसवें भाग को तत्पर तथा १ तत्पर के सौवें भाग को त्रुटि कहते हैं । निमेष के ऊपर की इकाइयों का सम्बन्ध यह है :— १८ निमेष = १ काष्ठा ३० काष्ठा = १ कला ३० कला = १ घटिका २ घटिका = १ मुहूर्त्त ३० मुहूर्त्त = १ दिन (नाक्षत्र) इस प्रकार १ नाक्षत्र दिन = ३० × २ × ३० × ३० × १८ निमेष = ९७२००० निमेष पहले दिखलाया गया है कि १ दिन में २१६०० प्राण अथवा ८६४०० सेकंड होते हैं इसलिए १ प्राण में ९७२०००/२१६०० निमेष अथवा ४५ निमेष और १ सेकंड में ११ १/४ निमेष होते हैं । नाक्षत्र अहोरात्र—नक्षत्र का अर्थ है तारा, तारा-समूह तथा उस चक्र का २७वां भाग जिस पर सूर्य एक वर्ष में एक परिक्रमा करता हुआ दीख पड़ता है। पृथ्वी की दैनिक गति के कारण आकाश के सब तारे पूरब में उदय हो कर ऊपर उठते, पश्चिम की ओर बढ़ते, पश्चिम में अस्त होते और फिर पूरब में उदय होते हैं । किसी तारे के उदय का समय घड़ी में देखकर लिख लीजिये और देखिए कि वह तारा फिर कब उदय होता है। यदि घड़ी ठीक हो तो इन दोनों उदयोँ के बीच का समय २३ घंटा ५६ मिनट और ४ सेकंड के लगभग होता है। इसी को नाक्षत्र अहोरात्र या केवल नाक्षत्र दिन कहते हैं । यह सदा एक-सा होता है, घटता बढ़ता नहीं, यदि तारों के बहुत सूक्ष्म गति का विचार न किया जाय । इसलिए ज्योतिषी लोग इसीसे समय का हिसाब लगाते हैं । सावन दिन — सूर्य के एक उदय से लेकर दूसरे उदय तक के समय को सावन दिन कहते हैं । यह नाक्षत्र दिन से कोई ४ मिनट बड़ा होता है । सावन दिन का १. इसका विशेष विवरण ज्योतिषोपनिषत नामक १३वें अध्याय में किया जायगा । २. सिद्धान्त शिरोमणि गणिताध्याय मध्यमाधिकार, काल मानाध्याय श्लोक १६, १७ ।