भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२८० सूर्य-सिद्धान्त अनुवाद—यदि उत्तर अक्षांश से उत्तर क्रान्ति कम हो तो मध्याह्नकालिक छायाकर्ण को पलभा से गुणा करके मध्याह्नकालिक कर्णाग्रा से भाग देने पर इष्ट- कालिक छायाकर्ण निकल आता है । विज्ञान भाष्य-- इस श्लोक का सार यह है :— जब सूर्य सममंडल में हो तब, मध्याह्न छायाकर्ण x पलभा छाया कर्ण = ————————————— (१) मध्याह्न कर्णाग्रा उपपत्ति—२२वें श्लोक के अनुसार, उदयकालिक अग्राज्या x मध्याह्न छायाकर्ण मध्याह्न कर्णाग्रा = ————————————————————— त्रिज्या ∴ समीकरण (१) में मध्याह्न कर्णाग्रा का यह मान उत्थापन करने से मध्याह्न छायाकर्ण x पलभा x त्रिज्या छायाकर्ण = —————————————————————— उदयकालिक अग्राज्या x मध्यान्ह छायाकर्ण पलभा x त्रिज्या = ————————— (२) उदयकालिक अग्राज्या समीकरण (२) में उदयकालिक अग्राज्या का मान २२वें श्लोक के प्रथम पंक्ति या वहाँ के समीकरण (१) के अनुसार उत्थापन करने से, पलभा x त्रिज्या छायाकर्ण = —————————— क्रान्ति ज्या x विषुवत्कर्ण ——————————— १२ पलभा x १२ x त्रिज्या = ————————————— क्रान्ति ज्या x विषुवत्कर्ण १२ x त्रिज्या परंतु १३वें श्लोक के अनुसार ——————— = लम्बज्या विषुवत्कर्ण पलभा x लम्बज्या ∴ छायाकर्ण = —————————— क्रान्तिज्या जो २५वें श्लोक के नियम का ही एक रूप है । इसलिए यह सिद्ध हुआ कि जब सूर्य सममंडल में हो तब मध्याह्न छायाकर्ण x पलभा छायाकर्ण = ————————————— मध्याह्न कर्णाग्रा कर्णाग्रा जानने की दूसरी रीति— स्वक्रान्तिज्या त्रिजीवाघ्ना लम्बज्याप्ताऽग्रमौर्विका ॥ सेष्टकर्णहता भक्ता त्रिज्ययाऽग्राऽङ्गुलात्मिका ।।२७।।