सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 321, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ें२६८ सूर्य-सिद्धान्त ·६४२१ - ·४२६२ × ·२५८८ = ────────────────────────── ·६०३२ × ·६६५६ ·६४२१ - ·११११ = ────────────────── ·८७२४ ·५३१० = ──────── ·८७२४ = ·६०८७ ∴ नत काल = ५२° ३०' = ३ घंटा ३० मिनट उदाहरण ३—यदि छाया २५·६१३ अंगुल और सूर्य की दक्षिण क्रान्ति १५° हो तो नत काल बतलाओ । स्परे नतांश = छाया / १२ = २५·६१३ / १२ = २·१५६४ ∴ नतांश = ६५° ६' यहाँ क्रान्ति दक्षिण है इसलिए ध्रुवांतर ६०° से अधिक है और समीकरण (१) में कोज्या (ध्रुवांतर) अथवा ज्या (क्रान्ति) ऋणात्मक होगी । इसलिए कोज्या (नत काल) कोज्या नतांश + ज्या (अक्षांश) + ज्या (क्रान्ति) = ────────────────────────────────────────────────── कोज्या (अक्षांश) × कोज्या (क्रान्ति) कोज्या ६५° ६' + ज्या २५° २५' × ज्या १५° = ───────────────────────────────────────────────── कोज्या २५° २५' × कोज्या १५° ·४२०२ + ·४२६२ × ·२५८८ = ────────────────────────── ·६०३२ × ·६६५६ ·४२०२ + ·११११ ·५३१३ = ──────────────── = ──────── = ·६०६० ·८७२४ ·८७२४ ∴ नत काल = ५२° २६' = ३ घंटा २६ मिनट ५६ सेकंड किसी समय की कर्णाग्रा जानकर सूर्य का भोगांश निकालना— इष्टाग्राघ्ना स्वलम्बज्या स्वकर्णाङ्गुलभाजिता । क्रान्तिज्या सात्रिजीवाघ्नी परमापक्रमोद्धृता ॥४०॥ तच्चापं भादिकं क्षेत्रं पदे र्भध्याद्वित्तिको रविः । अनुवाद—(४०) इष्टकाल की अग्रा अर्थात् कर्णाग्रा को लम्बज्या से गुणा करके इष्टकाल के छाया-कर्ण से भाग दे दो तो भागफल सूर्य की क्रान्तिज्या होगी । इसको त्रिज्या से गुणा करके परमाप क्रम ज्या से भाग देकर भागफल का धनु