सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार २६७ यह ध्यान रखना चाहिए कि घड़ी का यह समय शुद्ध स्थानीय काल है । इसको रेलवे के समय से मिलाने के लिए काल-समीकरण संस्कार तथा देशान्तर संस्कार करना पड़ेगा जिसकी चर्चा इसी अध्याय के अंत में की जायगी । नवीन रीति— छाया १४.३३ स्परे (नतांश) = ──── = ───── = १.१६४१ १२ १२ ∵ नतांश = ५२° ३' ∵ शंकु = नतांश कोटि ज्या = कोज्या ५०° ३' = .६४२१ समीकरण (ख) में सिद्ध किया गया है कि नतांश कोटिज्या = (नतकोटिज्या + चरज्या) × अक्ष कोटिज्या × क्रान्ति कोटिज्या ∵ .६४२१ = (नत कोटिज्या + .१२७३) × .९०३२ × .९६५६ = (नत कोटिज्या + .१२७३) × .८७२४ .६४२१ ∵ नत कोटिज्या + .१२७३ = ───── = .७३६० .८७२४ ∵ नत कोटिज्या = .७३६० - .१२७३ = .६०८७ ∵ नत काल = ५२° ३०' = ३ घंटा ३० मिनट इसलिए यदि पूर्व नत है तो समय होगा ८ बज कर ३० मिनट और पच्छिम नत है तो साढ़े तीन बजा रहेगा । नवीन रीति से नत काल निकालने में और सरलता होगी यदि समीकरण (१) से सीधे ही काम लिया जाय । इसका एक उदाहरण नीचे दिया जाता है :— उदाहरण २—छाया = १४.३३ अंगुल और क्रान्ति = १५° उत्तर तो प्रयाग में नत काल क्या है ? छाया १४.३३ स्परे (नतांश) = ──── = ───── = १.१६४१ १२ १२ ∵ नतांश = ५०° ३' ∵ कोज्या (नत काल) कोज्या ५०° ३' - ज्या २५° २५' × ज्या १५° = ────────────────────────────────────────── कोज्या २५° २५' × कोज्या १५°