सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ सूर्य-सिद्धान्त विधि कही गयी है तथापि इसी रीति से नतकाल में कुछ अंतर आ जाता है इसी से भास्कराचार्य ने इसे सुधार दिया है (देखो सिद्धान्त शिरोमणि) ।''* परन्तु मेरी समझ में यह अंतर इसलिए नहीं पड़ता कि नियम अशुद्ध है वरन् इसका कारण छाया की नाप की स्थूलता है । यदि छाया दो तीन दशमलव स्थान तक ठीक-ठीक नापी जाय और गुणा भाग में भी स्थूलता न आने पावे तो इस रीति से नतकाल जानने में कोई अशुद्धि नहीं हो सकती । उदाहरण १—यदि प्रयाग में किसी समय छाया १४.३३ अंगुल हो और सूर्य की क्रान्ति १५° उत्तर हो तो पूर्व या पच्छिम नतकाल बताओ और यह भी बतलाओ कि घड़ी में क्या बजा है ? सिद्धान्तीय रीति— छाया = १४.३३ अंगुल ∵ छाया कर्ण = √१२² + (१४.३३)² = १८.६६ अंगुल ∵ दृग्ज्या = १४.३३ × ३४३८ / १८.६६ = २६३६ कला ∵ शंकु = √३४३८² - २६३६² = २२०७ कला ∵ छेद = २२०७ × ३४३८ / ३१०६ और उन्नतज्या = २२०७ × ३४३८ / ३१०६ × ३४३८ / ३३२१ = २५२६ कला अन्त्या = ३८७६ (पहिले की तरह) ∵ नतोत्क्रमज्या = ३८७६ - २५२६ = १३४७ कला ∵ नतकाल = १३४७ कला का (उत्क्रम ज्या के अनुसार) धनु = ५२° ३२′ [देखो पृष्ठ १२०-१२१] = ३ घंटा ३० मिनट ८ सेकंड यदि नतकाल पूर्व हो तो १२ घंटे में से घटाने पर और पच्छिम हो तो १२ घंटे में जोड़ने पर धूपघड़ी का समय ज्ञात होगा । ∵ यदि पूर्व नतकाल हो तो धूप-घड़ी में १२ घंटा - ३ घंटा ३० मि० ८ सेकंड = ८ घंटा २६ मि० ५२ सेकंड होगा । और यदि पच्छिम नतकाल हो तो धूप-घड़ी में मध्याह्न के उपरान्त ३ घंटा ३० मिनट ८ सेकंड बीता है अर्थात् ३ बजकर ३० मिनट और ८ सेकंड हुआ है ।
- देखो हिन्दी साहित्य सम्मेलन से प्रकाशित सूर्य-सिद्धान्त पृष्ठ ६६ ।