भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 327, कुल 838 में से

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पृष्ठ 327

३०४ सूर्य-सिद्धान्त यह हुआ कि जब व का ९०° होगा तब व पू भी ९०° होगा । इसलिये मेषादि तीन राशियों के उदयासु ९० × ६० = ५४०० होंगे, जो १५ नाक्षत्र घड़ी या ६ नाक्षत्र घंटों के समान हैं । ४२वें श्लोक के पूर्वार्ध में लंका में मेष, वृष और मिथुन राशियों के उदयासु क्रम से १६७०, १७६५ और १९३५ दिये गये हैं जो समीकरण (१) से उपर्युक्त नियम के अनुसार प्राप्त हुए हैं और नीचे लिखे उदाहरण से स्पष्ट होंगे । उदाहरण—लंका में वृष राशि के उदयासु क्या हैं ? पहले मेष राशि के उदयासु जानना चाहिए। इसके लिए समीकरण (१) में 'क' का भोगांश ३० रखना होगा। इस समय 'का' सायन मेष का अन्तिम विन्दु और सायन वृष का आदि विन्दु है जिसकी क्रान्ति स्पष्टाधिकार के २८वें श्लोक से जानी जा सकती है । 'का' की क्रान्तिज्या = ज्या ३०° × १३९७ ────────────── ३४३८ = १७१६ × १३९७ ────────────── ३४३८ = ६६८ कला ∵ का की क्रान्ति = ७०३ कला = ११°४३′ ७०३ कला की उत्क्रमज्या = ७२ कला ∵ का की क्रान्ति कोटिज्या = ३४३८ - ७२ [देखो पृष्ठ २०८] = ३३६६ कला परम क्रान्ति कोटिज्या का मान जानने के लिए पहले परम क्रान्ति अर्थात् २४° की उत्क्रमज्या जानना चाहिए जो २६८ कला है । इसलिए परम क्रान्ति कोटिज्या = ३४३८ - २६८ = ३१४० कला ∵ समीकरण ( १ ) से ज्या ( व पू ) = ज्या ३०° × ३१४० ────────────── ३३६६ = १७१६ × ३१४० ────────────── ३३६६ = १६०४′ ∵ व पू = २७°५०′ = १६७०′ अर्थात् मेष राशि के उदयासु १६७० हैं । अब सायन मेष और वृष राशियों के सम्मिलित उदयासु जानना चाहिए ।

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