सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०६ सूर्य-सिद्धान्त तक परम क्रान्ति को २३°२७' मान कर सायन मेष इत्यादि के उदयासु जानने में पर्याप्त सूक्ष्मता होगी । नवीन रीति से २३°२७' की ज्या = ०.३९७६ जिसे नवीन रीति से सूर्य की परम क्रान्तिज्या समझना चाहिए । स्पष्टाधिकार के २८वें श्लोक के अनुसार सायन मेष के अन्तिम विन्दु की क्रान्तिज्या = ज्या ३०° × .३९७६ / १ [ नवीन रीति से त्रिज्या = १ ] = .५ × .३९७६ = .१९८० ∵ सायन मेष के अन्तिम विन्दु की क्रान्ति = ११°२६' इसी प्रकार सायन वृष के अन्तिम विन्दु की क्रान्तिज्या = ज्या ६०° × .३९७६ / १ = .८६६ × .३९७६ = .३४४६ ∵ सायन वृष के अन्तिम विन्दु की क्रान्ति = २०°६'.७ क्रान्तियों के इन मानों से उदयासु जानने के लिए समीकरण (१) में उचित संशोधन करने पर, सायन मेष के लिए ज्या ( व पू ) = ज्या ३०° × कोज्या २३°२७' / कोज्या ११°२६' = .५ × .९१७५ / .९७९८ = .४६८२ ∵ व पू = २७°५५' ∵ सायनमेष के उदयासु = १६७५ सायन मेष और वृष के सम्मिलित उदयासु के लिए ज्या ( व पू ) = ज्या ६०° × कोज्या २३°२७' / कोज्या २०°६.७ = .८६६ × .९१७५ / .९३८७ = .८४६४ ∵ व पू = ५७°४६' ∵ सायन मेष और वृष के उदयासु = ३४६६