भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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३२८ सूर्य-सिद्धान्त अन्तर ५ घड़ी ५४ पल कन्या का उदयकाल ५ ,, ३३ पल . तुला का गतकाल २१ पल इसके बाद की गणना पहले की ही तरह है। इससे सिद्ध होता है कि चाहे तात्कालिक सूर्य का निरयन भोगांश जानकर सावनकाल को ही नाक्षत्रकाल समझकर काम निकाला जाय अथवा उदयकालिक सूर्य के निरयन भोगांश जानकर इष्टकालिक सायनकाल को नक्षत्रकाल में बदल कर काम निकाला जाय दोनों में कोई अन्तर नहीं पड़ता। हाँ सावनकाल से नाक्षत्रकाल बनाकर काम निकालने में कुछ सुगमता होती है। इस रीति में प्रत्येक राशि का उदयकाल इष्टकाल में घटाना पड़ता है। यदि ३२०वें पृष्ठ को सारिणी के ६वें स्तम्भ से काम लिया जाय तो और भी सुविधा हो सकती है। सूर्योदय काल में कर्क का भोग्यकाल = ४ घड़ी ४८ पल परन्तु कर्क का उदयकाल = ५ घड़ी ४६ पल दोनों का अन्तर = ० घड़ी ५८ पल ∴ सूर्योदय काल में कर्क का गतकाल = ० घड़ी ५८ पल निरयन मेष के आदि से मिथुन के अन्त तक का उदयकाल = १४ घड़ी ३० पल ∴ सूर्योदय काल में क्रान्तिवृत्त के उदित भाग का उदयकाल = १५ घड़ी २८ पल इष्टकाल १६ घड़ी १८ पल इष्टकाल में क्रान्तिवृत्त के उदित भाग का उदयकाल = ३१ घड़ी ४६ पल जिससे कन्या तक का उदयकाल घट सकता है क्योंकि वह ३१ घड़ी २५ पल है ∴ तुला का गतकाल = २१ पल अर्थात् इष्टकाल में तुला राशि लग्न है। तुला राशि का कौन बिन्दु लग्न है यह जानने के लिए पहले की तरह आगे की क्रिया भी करनी चाहिए। भास्कराचार्य ने सायन सूर्य से लग्न साधन की रीति बतलायी है जो अधिक शुद्ध है क्योंकि यह बतलाया जा चुका है कि किसी राशि के ३० अंश के प्रत्येक अंश समानकाल में उदय नहीं होते इसलिए उचित यह है कि प्रत्येक अंश के उदयासु