सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३२ सूर्य-सिद्धान्त दूसरा खण्ड— जब इष्टकाल ५२ घड़ी १० पल होगा तब पच्छिम नतकाल = ५२ घड़ी १० पल - १६ घड़ी ४३ पल अर्थात् मध्याह्न के उपरान्त ३५ घड़ी २७ पल भर सूर्योदय से ५२ घड़ी १० पल बीता रहेगा । इस समय सूर्य का निरयन भोगांश = ३^रा ५° ५१' इसलिए कर्क राशि का भोगांश = २४°६' जब पूरी कर्क राशि १८३३ असुओं में यामोत्तर वृत्त का उल्लंघन करती है तब इसकी २४°६' कितने असुओं में उल्लंघन करेगी । १८०० : १४४६ : : १८३३ : भोगांश का उल्लंघन काल ∴ भोगांश का उल्लंघन काल = १४४६ x १८३३ / १८०० = १४७६ असु = २४६ पल = ४ घड़ी ६ पल अब पच्छिम नतकाल = ३५ घड़ी २७ पल मध्याह्न के बाद कर्क के उल्लंघन में ४ घड़ी ६ पल लगेगा अन्तर ३१ घड़ी २१ पल सिंह का यामोत्तर उल्लंघन ४ घड़ी ४२ पल में होता है अन्तर २६ घड़ी ३९ पल कन्या का यामोत्तर उल्लंघन ४ घड़ी ३७ पल में होता है अन्तर २२ घड़ी २ पल तुला का यामोत्तर उल्लंघन ४ घड़ी ५३ पल में होता है अन्तर १७ घड़ी ६ पल वृश्चिक का यामोत्तर उल्लंघन ५ घड़ी १७ पल में होता है अन्तर ११ घड़ी ५२ पल धनु का यामोत्तर उल्लंघन ५ घड़ी २५ पल में होता है अन्तर ६ घड़ी २७ पल मकर का यामोत्तर उल्लंघन ५ घड़ी ५।। पल में होता है अन्तर १ घड़ी २१।। पल ∴ कुम्भ राशि यामोत्तर वृत्त पर लग्न है । क्योंकि अन्तिम अन्तर से कुम्भ राशि का यामोत्तर उल्लंघन काल नहीं घटता है इसलिए यही अशुद्ध राशि है । अब यह देखना है कि इसका कौन बिन्दु यामोत्तर वृत्त पर है ।