सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 356, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार ३३३ कुम्भ का यामोत्तर उल्लंघन काल = ४ घड़ी ४२ पल = १६६४ असु १ घड़ी २१।। पल = ८१।। पल = ४८६ असु इसलिए जब १६६४ असुओं में १८०० कला का उल्लंघन होता है तब ४८६ असुओं में कितना होगा । १६६४ : ४८६ : : १८०० : गतांश ∴ गतांश = (४८६ × १८००) / १६६४ = ५२०' = ८°४०' ∴ कुम्भ राशिका ८°४०' यामोत्तर उल्लंघन कर चुका ∴ मध्यम या दशम लग्न = १०^{रा} ८°४०' स्पष्ट सूर्य और लग्न से समय जानना— भोग्याशेनूनकस्याथ भुक्तासूनधिकस्य च । संपिण्ड्यान्तरलग्नासूनवं स्यात्कालसाधनम् ॥४६॥ सूर्यादूने निशाशेषे लग्नेऽर्काधिके दिवा । भचक्रार्धयुताद्भानोः अधिकेऽस्तमयात्परम् ॥५०॥ अनुवाद—(४६) लग्न और स्पष्ट सूर्य की राशियों में जो कम हो उसके भोग्पासुओं और जो अधिक हो उसके भुक्तासुओं को जोड़कर दोनों के बीच में जो पूरी राशियां हों उनके उदयासुओं को भी जोड़ लो । इसी योगफल से इष्टकाल जाना जाता है । (५०) रात्रि कुछ शेष रहने पर अर्थात् मध्य रात्रि के पीछे और सूर्योदय के पहले सूर्य की राशि से लग्न की राशि कम होती है, सूर्योदय के पीछे दिन में सूर्य की राशि लग्न की राशि से कम होती है और सूर्यास्त के पीछे सूर्य की राशि में ६ राशि जोड़ने पर भी लग्न की राशि अधिक होती है । इति त्रिप्रश्नाधिकार नामक तीसरे अध्याय का अनुवाद समाप्त हुआ । विज्ञान भाष्य—इष्टकाल और उसके स्पष्ट सूर्य से लग्न जानने की जो रीति ४५-४७ श्लोकों में दी गयी है उसी की विलोम (उलटा) क्रिया ४६-५० श्लोकों में बतलायी गयी है । इसलिए इसकी उपपत्ति समझाने की आवश्यकता नहीं जान पड़ती । दिन में सूर्य की राशि से उदय लग्न आगे होती है इसलिए सूर्य की राशि लग्न से कम होता है । मध्य रात्रि के बाद उदय लग्न के आगे सूर्य रहता है इसलिए उस समय लग्न सूर्य से कम होती है । सूर्यास्त के समय उदय लग्न सूर्य से ठीक ६ राशि आगे रहती है इसलिए इसके उपरान्त उदय लग्न ६ राशि युक्त स्पष्ट सूर्य (सषड्भ सूर्य) से अधिक होती है ।