सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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३५२ सूर्य-सिद्धान्त इससे दो वक्र बन गये हैं। दो पासवाली ऊर्ध्वाधर (vertical) रेखाओं के बीच का अन्तर ३ अंश और दो पासवाली क्षितिज (horizontal) रेखाओं के बीच का अन्तर एक पल माना है। जब भा शून्य होता है तब र + १८.६ पल होता है और रा शून्य होता है इसलिये शून्य भोगांश के सामने धनात्मक दिशा में १९वीं क्षैतिज रेखा पर र के लिए एक बिन्दु बना दिया है। जब भा ३० अंश होता है तब र + १८.२ और रा - २.१४ होते हैं। इसलिए ३० भोगांश के सामने धनात्मक दिशा में १८वीं