सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५६ सूर्य-सिद्धान्त अर्थात् तुला की १६वीं तिथि को काल समीकरण - २७ बढ़कर - ४०.२ पल हो जायगा जो - १६ मिनट के लगभग है। यह बतलाया गया है कि मध्यम काल = स्पष्ट सावन काल + काल समीकरण ∵ ५ घंटा २४ मिनट = स्पष्ट सावन काल + (- १६ मिनट) ∴ स्पष्ट सावन काल = ५ घंटा २४ मिनट + १६ मिनट = ५ घंटा ४० मिनट यह समय ग्रीनविच से ८२ १/२ अंश पूर्व के देशान्तर-रेखा पर स्थित स्थानों की धूपघड़ियों में होगा क्योंकि भारतवर्ष भर के तारघरों और रेल के स्टेशनों की घड़ियाँ इसी देशान्तर रेखा के मध्यम काल से मिली रहती हैं। काशी ग्रीनविच से ८३° ३' ४" अथवा ८३° ३' पूर्व है जो ८२° ३०' से ३३' अधिक है इसलिए काशी का स्पष्ट सावन काल उपयुक्त सावन काल से ३३ असु अथवा ५ १/२ पल अधिक होगा जो २ मिनट १२ सेकन्ड अथवा २ मिनट के समान है। इसलिए उस समय काशी की धूप-घड़ी में ५ बजकर ४२ मिनट हुआ रहेगा । प्रयाग का देशान्तर ८१° ५५' १५" पूर्व है इसलिए यह ८२° ३०' से ३४' ४५" पच्छिम है। इसलिए यहाँ की धूप-घड़ी ३४ ३/४ असु या २ मिनट १६ सेकंड पीछे होगी। इसलिए प्रयाग की धूपघड़ी में इस समय ५ घंटा ३७ मिनट ४१ सेकंड होगा। उदाहरण ३—दूसरे उदाहरण में जो समय दिया हुआ है उस समय प्रयाग में क्या लग्न होगा ? पहले सूर्योदय का स्पष्ट काल जानना आवश्यक है। इसके लिए प्रयाग का चर काल जानना चाहिए । सूर्य का निरयन भोगांश = ६ रा १५° २३' ३४" १६८२ वि० की १६ तुला को अयनांश = २२° ४१' ६" [दे० पृ० २५३] ∴ सूर्य का सायन भोगांग = ७ रा ८° ४' ४०" = ७ रा ८° ५' = ६ राशि + ३८° ५' ∴ सूर्य की क्रान्ति ज्या = ज्या ३८° ५' × ज्या २३° २७' [दे० पृ० १२३] = ˙६१६८ × ˙३९७६ = ˙२४५४